बेंगलुरु, नौ जून भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) ने एक अध्ययन के बाद कहा है कि हो सकता है कि भारत में नया कोरोना वायरस यूरोप, ओसीनिया और पश्चिम एशिया क्षेत्रों से आया हो।
आईआईएससी ने यह बात 294 भारतीय विषाणु जीनोम का अध्ययन करने के बाद कही। अध्ययन करने वाली टीम में कुमार सोमसुंदरम, अंकित लॉवर्डे और मैनाक मंडल शामिल थे।
अध्ययन का उद्देश्य विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत में पाए जाने वाले सार्स-कोव-2 विषाणुओं के बीच आनुवंशिक विविधता का पता लगाना था।
टीम ने कहा कि भारत में नए कोरोना वायरस का संभावित मूल मुख्यत: यूरोप, पश्चिम एशिया, ओसीनिया और दक्षिण एशिया क्षेत्रों से प्रतीत होता है जिसका प्रसार ऐसे देशों से अधिक होता है जहां की लोग अधिक यात्रा करते हैं।
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इसने यह भी उल्लेख किया कि विश्व में नए कोरोना वायरस की चपेट में 50 लाख से अधिक लोग आए हैं, वहीं भारत में इसने हाल ही में एक लाख का आंकड़ा पार किया है।
टीम के अनुसार, भारत में संक्रमण की निम्न दर का कारण लंबे समय तक लागू रहा लॉकडाउन, प्रभावी भौतिक दूरी, कोविड-19 के रोगियों की सटीक पहचान और उन्हें पृथक-वास में रखकर उचित उपचार जैसे कारक हो सकते हैं।
इसने कहा, ‘‘विभिन्न क्षेत्रों अथवा देशों से विषाणु जीनोम अनुक्रम की तुलना से हमें विषाणुओं में आनुवंशिक विविधता का पता लगाने में मदद मिलती है। इससे विषाणु की प्रचंडता, बीमारी का स्तर और मूल तथा देशों के बीच सार्स-कोव-2 के प्रसार के बारे में जानने में सहायता मिलेगी।’’
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