चंडीगढ़, नौ मार्च शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने रविवार को पार्टी नेताओं को अनुशासन भंग करने के खिलाफ चेतावनी दी।
इससे एक दिन पहले ही वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और कुछ अन्य ने अकाल तख्त और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदारों की बर्खास्तगी की कड़ी निंदा की थी।
शिअद के कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और पार्टी के फैसलों के खिलाफ कुछ नेताओं द्वारा जारी बयानों और वीडियो को गंभीरता से लिया है।
मजीठिया और कुछ अन्य नेताओं ने शिरोमणि अकाली दल में दरार का संकेत देते हुए अकाल तख्त और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदारों की बर्खास्तगी की शनिवार को कड़ी निंदा की।
इस बयान पर भूंदड़ ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और मजीठिया पर पार्टी नेता सुखबीर सिंह बादल की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया।
मजीठिया एसजीपीसी के दो जत्थेदारों को हटाने के फैसले पर सवाल उठाने वाले पहले वरिष्ठ शिअद नेता हैं।
एसजीपीसी ने शुक्रवार को ज्ञानी रघबीर सिंह को अकाल तख्त के जत्थेदार के पद से और ज्ञानी सुल्तान सिंह को तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार के पद से हटा दिया था।
मजीठिया और कुछ अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब बागी पार्टी नेताओं ने एसजीपीसी पर बादल के नेतृत्व वाले शिअद नेताओं के एक वर्ग के इशारे पर जत्थेदारों को हटाने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
शिअद की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘‘रविवार को चंडीगढ़ में पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई।’’
बैठक में वरिष्ठ शिअद नेता गुलजार सिंह रणिके, जनमेजा सिंह सेखों, महेश इंदर सिंह ग्रेवाल, हीरा सिंह गभरिया और दलजीत सिंह चीमा शामिल हुए।
भूंदड़ ने कहा कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी मंच पर सभी को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है, लेकिन किसी को भी पार्टी के अनुशासन का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं है।
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