नयी दिल्ली, 24 मार्च कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने सोमवार को खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाये जाने के मामले में उत्तर-दक्षिण के बीच विभाजन को चिह्नित किया। उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि राज्य में केले के पकौड़े और दाल वड़ा पर 18 प्रतिशत कर लगाया जाता है, जबकि उत्तर भारतीय मिठाइयों पर केवल 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है।
लोकसभा में वित्त विधेयक, 2025 पर बहस के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए, कांग्रेस सांसद ने केंद्र पर कर नीतियों में क्षेत्रीय भेदभाव करने का आरोप लगाया और अधिक न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाये जाने की मांग की।
ईडन ने कहा, ‘‘हमने सरकार को धर्म, भोजन और यहां तक कि हमारे द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों के आधार पर देश को विभाजित करते देखा है। लेकिन यह पहली बार है जब हम जीएसटी ढांचे में भी उत्तर-दक्षिण विभाजन देख रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि केरल के व्यंजन जैसे केले के पकौड़े, दाल वड़ा और चावल के पकौड़े पर 18 प्रतिशत कर लगता है, जबकि जलेबी, बर्फी और गुलाब जामुन जैसी उत्तर भारतीय मिठाइयों पर केवल 5 प्रतिशत जीएसटी है।
ईडन ने जीएसटी ढांचे के कारण छोटे व्यवसायों पर होने वाले वित्तीय दबाव को रेखांकित किया, खासकर केरल में जहां पारंपरिक ‘स्नैक्स’ रोजाना की जरूरत का सामान है।
उन्होंने बताया कि केरल के मुख्य खाद्य पदार्थों पर कर का बोझ अधिक है, जबकि व्यापक रूप से खपत की जाने वाली उत्तर भारतीय मिठाइयों पर कर की दर कम है।
कांग्रेस नेता ने प्रमुख आर्थिक संकेतकों में गिरावट का भी जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि परिवहन वृद्धि 6.4 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत और बैंक ऋण वृद्धि 21 लाख करोड़ रुपये से घटकर 11.5 लाख करोड़ रुपये रह गई है। बुनियादी ढांचे के विकास का एक महत्वपूर्ण संकेतक माने जाने वाले सीमेंट उत्पादन 10.3 प्रतिशत से घटकर 3.1 प्रतिशत रह गया है।
ईडन ने कहा, ‘‘ये आंकड़े सरकार के मजबूत आर्थिक विकास के दावों के खोखलेपन को उजागर करते हैं।’’
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