जरुरी जानकारी | वित्त आयोग की समिति का राजकोषीय घाटे के लिये लक्ष्य के बजाय दायरा तय करने का सुझाव
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. पंद्रहवें वित्त आयोग की आर्थिक सलाहकार समिति ने केंद्र और राज्यों के राजकोषीय घाटे का सीधे लक्ष्य रखने के बजाय उसका दायरा तय किये जाने का सुझाव दिया है। आयोग के चेयरमैन एन के सिंह ने शुक्रवार को बताया कि समिति की एक रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है।
नयी दिल्ली, चार सितंबर पंद्रहवें वित्त आयोग की आर्थिक सलाहकार समिति ने केंद्र और राज्यों के राजकोषीय घाटे का सीधे लक्ष्य रखने के बजाय उसका दायरा तय किये जाने का सुझाव दिया है। आयोग के चेयरमैन एन के सिंह ने शुक्रवार को बताया कि समिति की एक रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है।
सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी से दुनिया में अनिश्चितता बढ़ी है, ऐसे में आयोग ने इस विचार को खारिज नहीं किया है। हालांकि, राजकोषीय घाटे के लिए दायरे रखने के सुझाव पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
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सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अनिश्चितताओं के मद्देनजर मेरा मानना है कि कोई संख्या रखे जाने के बजाय दायरा निर्धारित करने पर विचार किया जा सकता है। यह दायरा मौद्रिक नीति में मुद्रास्फीति के लक्ष्य दो प्रतिशत ऊपर या नीचे की तरह हो सकता है।’’
हालांकि, सिंह ने कहा कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को संख्या में रखने के बजाय दायरे में रखने के लिए राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून में संशोधन करने की जरूरत होगी।
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उन्होंने कहा, ‘‘दायरे का मतलब होगा कि एफआरबीएम कानून में संशोधन किया जाए। अभी इस कानून में राजकोषीय घाटे के लिए एक निश्चित संख्या रखने का प्रावधान है।’’
वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में सरकार ने एफआरबीएम कानून में प्रदान की गई 0.5 प्रतिशत की छूट के लिए पिछले साल और चालू वित्त वर्ष के लिए राहत प्रावधान का इस्तेमाल किया था। इससे राजकोषीय घाटे का लक्ष्य इन दो सालों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का क्रमश: 3.8 प्रतिशत और 3.5 प्रतिशत रखा गया।
हालांकि, केंद्र द्वारा चालू वित्त वर्ष में बाजार से रिकॉर्ड 12 लाख करोड़ रुपये के कर्ज तथा राज्यों के कर्ज की सीमा को उनके जीडीपी के तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने से सरकारों का घाटा महामारी से पहले बजट में लगाए गए अनुमान से कहीं ऊंचा रहने का अनुमान है। वहीं, मौद्रिक नीति के तहत रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) रखने का लक्ष्य दिया गया है।
15वां वित्त आयोग अपनी अपनी अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर अत तक सौंप देगा। आयोग को 2021- 22 से लेकर 2025- 26 तक के लिये अपनी रिपोर्ट 30 अकटूबर 2020 तक सौंपनी है।
अजय
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