नयी दिल्ली, 15 सितंबर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में बाघों की मौत में वृद्धि होने की जांच के लिए दो सदस्यीय एक समिति गठित की है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 13 सितंबर को गठित समिति को 30 दिनों के अंदर एक व्यापक रिपोर्ट सौंपनी है।
खबरों के अनुसार, महाराष्ट्र में इस साल बाघों की अधिक संख्या में मौत हुई है। अब तक कुल 33 बाघों की मौत हुई है, जो हालिया वर्षों में सर्वाधिक संख्या है। पिछले साल यह संख्या 31 थी।
विदर्भ क्षेत्र में, महाराष्ट्र के छह में से पांच बाघ अभयारण्य हैं।
प्राधिकरण के एक अधिकारी ने ज्यादातर बाघों की मौत के लिए मानव-पशु संघर्ष को जिम्मेदार ठहराया है।
वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के निदेशक जोस लुइस ने बताया कि क्षेत्र में बाघों की आबादी पिछले कुछ वर्षों में अधिक बढ़ी है। उन्होंने कहा कि चूंकि नये बाघ अपना इलाका तय करना चाहते हैं, ऐसे में वे अक्सर अनजान इलाकों में घुस जाते हैं जो उनके संरक्षित क्षेत्रों से बाहर होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ये इलाके अन्य जंगल हो सकते हैं। नये वास स्थल की तलाश में, बाघों का अक्सर मानव आबादी के साथ सामना होता है, जिससे मानव-पशु संघर्ष होता है।’’
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