देश की खबरें | नीट में कृपांक पाने वाले 1,500 से अधिक अभ्यर्थियों के परिणामों की समीक्षा के लिए समिति गठित: एनटीए

नयी दिल्ली, आठ जून राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में अंक बढ़ाए जाने के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने शनिवार को कहा कि शिक्षा मंत्रालय ने कृपांक पाने वाले 1,500 से अधिक अभ्यर्थियों के परिणामों की समीक्षा के लिए चार सदस्यीय एक समिति गठित की है।

एनटीए ने किसी भी अनियमितता का खंडन करते हुए कहा है कि एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों में बदलाव तथा परीक्षा केंद्र में समय जाया होने के लिए दिए गए कृपांक विद्यार्थियों के अधिक अंक आने की वजह हैं।

इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने कथित अनियमितताओं की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की है। वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पर्चा लीक, धांधली और भ्रष्टाचार कई परीक्षाओं का अभिन्न अंग बन गए हैं। पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर युवाओं को धोखा देने और उनके भविष्य से खेलने का भी आरोप लगाया है।

कई वर्गों से पुनः परीक्षा कराने की मांग की जा रही है और आरोप लगाया गया है कि छह परीक्षा केंद्रों पर वक्त जाया होने की भरपाई के लिए दिए गए कृपांक के कारण अंक बढ़ गए हैं जिससे अन्य अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हुए हैं।

ये केंद्र मेघालय, हरियाणा के बहादुरगढ़, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बालोद, गुजरात के सूरत और चंडीगढ़ में हैं।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा का परिणाम चार जून को घोषित किया गया था। परीक्षा में 67 अभ्यार्थियों ने पहला स्थान प्राप्त किया था, जिनमें से छह हरियाणा के एक ही केंद्र से थे। इस वर्ष परीक्षा के लिए रिकॉर्ड 24 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था।

एनटीए के महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, “1,500 से ज्यादा अभ्यर्थियों के नतीजों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। यूपीएससी के पूर्व अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय समिति एक हफ्ते में अपनी सिफारिशें पेश करेगी और इन अभ्यर्थियों के नतीजों में संशोधन किया जा सकता है।”

उन्होंने कहा, “कृपांक दिए जाने से परीक्षा के योग्यता मानदंड पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और प्रभावित अभ्यर्थियों के परिणामों की समीक्षा से प्रवेश प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”

विशेषज्ञों के अनुसार, नीट यूजी 2024 के परिणाम में अंक बढ़ाए जाने से इस वर्ष मेडिकल कॉलेजों में स्थान प्राप्त करना अधिक कठिन हो सकता है।

कुछ छात्रों ने परिणाम रद्द करने और पुनः परीक्षा कराने की मांग को लेकर ऑनलाइन मंचों का रुख किया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या कुछ छात्रों के लिए परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, एनटीए महानिदेशक ने कहा कि इसका निर्णय समिति की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा।

करेल में कांग्रेस ने कहा कि नीट के नतीजों ने मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय परीक्षा की प्रामाणिकता पर चिंता पैदा कर दी है और कई छात्रों ने इसकी प्रक्रिया पर संदेह जताया है।

एनटीए के महानिदेशक सिंह ने पर्चा लीक या परीक्षा में किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया तथा दोहराया कि इस महत्वपूर्ण परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया गया है।

कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “ पर्चा लीक, धांधली और भ्रष्टाचार नीट समेत कई परीक्षाओं का अभिन्न अंग बन गई हैं। इसकी सीधी जिम्मेदारी मोदी सरकार की है। अभ्यार्थियों के लिए भर्ती परीक्षाओं में भाग लेना, फिर अनेकों अनियमितताओं से जूझना, पेपर लीक के चक्रव्यूह में फंसना, उनके भविष्य से खिलवाड़ है। भाजपा ने देश के युवाओं को ठगा है। ”

उन्होंने कहा, “हमारी मांग है कि उच्चतम न्यायालय की देखरेख में एक उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए जिससे नीट व अन्य परीक्षाओं में भाग लेने वाले हमारे प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को न्याय मिले।”

महाराष्ट्र सरकार ने पिछले महीने हुई नीट-यूजी को तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि नतीजों में राज्य के छात्रों के साथ अन्याय हुआ है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा कि नीट के नवीनतम परिणामों ने एक बार फिर परीक्षा का विरोध करने के द्रमुक के रुख को सही साबित कर दिया है और दोहराया कि प्रवेश परीक्षा सामाजिक न्याय और संघवाद के खिलाफ है।

एनटीए के महानिदेशक ने दोहराया कि कटऑफ में वृद्धि परीक्षा की प्रतिस्पर्धी प्रकृति और इस वर्ष अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त उच्च अंकों को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, "2023 में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 20,38,596 थी, जबकि 2024 में परीक्षार्थियों की संख्या बढ़कर 23,33,297 हो गई। अभ्यर्थियों की संख्या में वृद्धि के कारण स्वाभाविक रूप से अधिक अंक आएंगे।”

कृपांक देने के तर्क को समझाते हुए सिंह ने कहा कि यह प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय द्वारा 2018 के फैसले में तैयार और अपनाए गए फॉर्मूले का उपयोग करके पूरी की गई है।

परीक्षा के समय के नुकसान के बारे में रिट याचिकाओं और अभ्यावेदनों के माध्यम से अभ्यर्थियों द्वारा उठाई गई चिंताओं का पता लगाया गया और 1,563 अभ्यर्थियों को समय की हानि के लिए क्षतिपूर्ति दी गई, और ऐसे अभ्यर्थियों के संशोधित अंक -20 से 720 अंकों तक हैं। अधिकारी ने कहा कि इनमें से दो अभ्यर्थियों के अंक भी क्षतिपूर्ति अंकों के कारण क्रमशः 718 और 719 हैं।

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