ताजा खबरें | तटीय जलकृषि प्राधिकरण विधेयक को संसद की मंजूरी मिली

नयी दिल्ली, नौ अगस्त संसद ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें तटीय जल कृषि कानून के दायरे का विस्तार करने, कारावास के प्रावधानों को हटाने तथा पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों से समझौता किये बिना नियामक अनुपालन शर्तों को आसान बनाने के प्रावधान किए गए हैं।

राज्यसभा ने संक्षिप्त चर्चा के बाद तटीय जलकृषि प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2023 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

उच्च सदन ने विधेयक को चर्चा और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला के जवाब के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

चर्चा का जवाब देते हुए रुपाला ने कहा कि आजादी के बाद 2014 तक इस विभाग के जरिए मात्र 3861 करोड़ रुपये खर्च किए गए जबकि भारत में विशाल समुद्री तट है और करोड़ों की संख्या में मछुआरे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इसके लिए अलग विभाग बनाया गया और विभिन्न योजनाएं शुरू की गईं जिन पर कुल 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने देश में नीली क्रांति के लिए 5,000 करोड रुपये का आवंटन किया है।

रुपाला ने कहा कि यह विधेयक अप्रैल में लोकसभा में पेश किया गया था और इसे स्थायी समिति को भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति ने विधेयक पर गहन चर्चा की और 56 संशोधनों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि समिति द्वारा सुझाए गए 56 संशोधनों में 45 को स्वीकार कर लिया गया।

उन्होंने कहा कि मछुआरे समुद में देश के पहले पहरेदार हैं और वे रोज जोखिम का सामना करते हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक के जरिए उनकी कई चुनौतियों और आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है।

रुपाला ने कहा कि मछुआरों को भी क्रेडिट कार्ड मुहैया कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसमें बैंकों को कम रुचि है इसलिए जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मछुआरों को गहरे सागर में जाने के लिए सुविधा मुहैया करायी जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र को बीमा मुहैया कराने की दिशा में काम कर रही है, हालांकि कंपनियों की रूचि नहीं है लेकिन सरकार प्रयास कर रही है।

सदन में जब इस विधेयक पर चर्चा हो रही थी तो विपक्षी सदस्य मौजूद नहीं थे। मणिपुर मुद्दे पर चर्चा और प्रधानमंत्री के बयान की मांग पर विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से पहले ही बहिर्गमन कर दिया था।

इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने विधेयक का समर्थन किया और कहा कि उनके राज्य ओडिशों के लिए एक अहम विधेयक है। उन्होंने कहा कि ओडिशा सहित तटीय राज्यों के लिए फायदेमंद है। उन्होंने अपने राज्य में एक शोध केंद्र स्थापित करने की सरकार से मांग की।

वाईएसआर कांग्रेस के मस्थान राव वीडा ने कहा कि अगर मौजूदा व्यवधानों को दूर कर लिया जाए तो भारत में जल कृषि क्षेत्र का काफी विकास हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के विशाल समुदी तट को देखते हुए इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में देश के लिए निर्यात की भी अच्छी संभावनाएं हैं।

तेदेपा के कनकमेदला रवींद्र कुमार ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में जलकृषि क्षेत्र की स्थिति खराब हो रही है।

वाईएसआर कांग्रेस सदस्य वी विजय साई रेड्डी ने जलकृषि से जुड़े किसानों को भी फसल बीमा सुविधा मुहैया कराने की मांग की।

अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरई ने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में समुद्री उत्पादों के निर्यात में हुई खासी वृद्धि का जिक्र किया। उन्होंने मछुआरों की मदद के लिए विभिन्न कदम उठाए जाने की मांग की।

टीएमसी (एम) सदस्य जी के वासन ने कहा कि इस सरकार ने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी के लिए अलग मंत्रालय बनाया जिससे पता लगता है कि यह सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए काफी गंभीर है। उन्होंने मछुआरों को समुद्र में होने वाली परेशानी का जिक्र करते हुए उनकी मुसीबतों को दूर करने के लिए सरकार से कदम उठाने की मांग की।

इस विधेयक का मकसद भारत में तटीय जलकृषि की क्षमता का उचित दोहन करना है। साथ ही, इसका उद्देश्य 2005 के अधिनियम में संशोधन करके इसके दायरे को वर्तमान तटीय जलकृषि फार्म से परे विस्तारित करना है।

इस विधेयक में क्षेत्रीय जरूरतों और मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर नियमों में नवीनीकरण करने का प्रस्ताव किया गया है ताकि तटीय जलकृषि फार्म और अन्य गतिविधियों के पंजीकरण में आने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सके।

विधेयक में वर्तमान कानून की एक धारा में संशोधन करके कारावास के प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है।

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