देश की खबरें | कोल इंडिया भविष्य के पर्वतारोहियों की आर्थिक मदद की नीति पर कर रही विचार : प्रसाद

रांची, 20 अगस्त कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के अध्यक्ष पी. एम. प्रसाद ने रविवार को कहा कि भविष्य के पर्वतारोहियों को आर्थिक सहायता मुहैया कराने की नीति पर वे विचार कर रहे हैं।

प्रसाद ‘एवरेस्ट समिट’ के उद्घाटन सत्र को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये कोलकाता से संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम एवरेस्ट फतह के 70 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में रांची स्थित सेंट्रल कोलफिल्ड लिमिटेड (सीसीएल) के सम्मेलन केंद्र में आयोजित किया गया था।

प्रसाद ने कहा कि पर्वतारोहण न केवल मुश्किल कार्य है, बल्कि महंगा भी है। उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए कोई कोष होना चाहिए भले यह सरकार से मिले या फिर हमारे सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व) से। हम भविष्य के पर्वतारोहियों के लिए इसपर काम कर रहे हैं।’’

उद्घाटन सत्र के दौरान दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी एवरेस्ट को फतह करने वाले 14 पर्वतारोहियों को उनकी उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर पर्वतरोहियों ने एवरेस्ट की चोटी की चढ़ाई के दौरान हुए अपने अनुभवों को साझा किया और कर्मचारियों एवं अन्य हितधारकों को प्रेरित किया।

इस अवसर पर सीसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डॉ. बी वीरा रेड्डी ने कहा कि पर्वतरोहियों और खनिकों में कई समानताएं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पर्वतरोहियों की तरह खनिक भी कई चुनौतियों का सामना करते हैं, जैसे 600 से 700 मीटर या यहां तक एक किलोमीटर गहराई में जाने पर उन्हें उच्च तापमान और आर्द्रता का सामना करना पड़ता है।’’

खेलों के प्रोत्साहन में सीसीएल के योगदान को रेखांकित करते हुए रेड्डी ने कहा कि वह रांची के खेलगांव स्थित झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रोमोशन सोसाइटी अकादमी (जेएसएसपीएस) का संचालन कर रहे हैं और करीब 400 खिलाड़ियों को वहां प्रशिक्षण मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि अब तक अकादमी के खिलाड़ियों ने 900 पदक जीते हैं और सीसीएल ने करीब 550 करोड़ रुपये सीएसआर के तहत खर्च किये हैं।

संवाद सत्र के दौरान पर्वतारोहियों ने अप्रशिक्षित और बिना तैयारी के पर्वरोहियों के चढ़ाई पर जाने को लेकर चिंता जताई।

सात पर्वत चोटियों को फतह करने वाली पहली भारतीय महिला प्रेमलता अग्रवाल ने कहा, ‘‘कई लोग बिना प्रशिक्षण या तैयारी के पर्वतारोही बनने की कोशिश करते हैं। वे पहाड़ों को प्रदूषित करते हैं और न केवल अपने लिए, बल्कि अन्य के लिए भी समस्या उत्पन्न करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब पहाड़ी से लौटते हैं तो बैग में मानव अपशिष्ट लाते हैं।’’

एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाली झारखंड की पहली आदिवासी महिला बिनिता सोरेन के अलावा मनीषा वाघमारे, सत्यरूप सिद्धांत, रणवीर जामवाल, कुंतल जोइशर, प्रियंका मोहिते आदि ने भी इस मौके पर अपने-अपने अनुभव साझा किए।

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