देश की खबरें | यमुना की सफाई: जमीन विवाद सुलझाने के लिए समिति गठित

नयी दिल्ली, 13 फरवरी दिल्ली के उपराज्यपाल के नेतृत्व में यमुना की सफाई को लेकर बनी उच्चस्तरीय समिति ने राष्ट्रीय राजधानी सरकार द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार जलमल शोधन संयंत्र (एसटीपी) और जैव विविधता पार्क बनाने के लिए जमीन की पहचान करने के वास्ते एक समिति गठित की है।

दिल्ली में जमीन की उपलब्धता में समस्या होने की वजह से कई एसटीपी और विकेंद्रीकृत जलमल शोधन संयंत्रों (डीएसटीपी) के निर्माण में देरी हो रही है जबकि अरविंद केजरीवाल सरकार ने वर्ष 2025 तक यमुना के जल को नहाने लायक बनाने का लक्ष्य रखा है।

दिल्ली जल बोर्ड मौजूदा एसटीपी को उन्नत कर रहा है और नए एसटीपी एवं डीएसटीपी का निर्माण कर रहा है ताकि दिल्ली में पैदा होने वाले जलमल का पूरी तरह से शोधन हो सके जिससे यमुना में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

एनजीटी को 31 जनवरी को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘उच्चस्तरीय समिति ने संभागीय आयुक्त, दिल्ली सकरार के राजस्व विभाग और प्रधान सचिव (वन एवं पर्यावरण विभाग), दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष, दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नेतृत्व में समिति गठित करने का फैसला किया है जो सभी जमीन संबंधी (जमीन की पहचान कर उन्हें एसटीपी, डीएसटीपी के निर्माण के लिए डीजेएल को हस्तांरित करने) कार्य को देखेगी। समिति सुनिश्चित करेगी कि संभव हो तो एक पखवाड़े में डीजेबी या एनएमसीजी के लिए जमीन की पहचान और इसे सौंपने का कार्य करे।’’

दिल्ली सरकार की योजना 40 डीएसटीपी का निर्माण करने की है जिनमें से 14 का निर्माण नजफगढ़ नाला क्षेत्र में किया जाना है। इससे दिल्ली में रोजाना जलमल शोधन की क्षमता में 9.2 करोड़ गैलन की वृद्धि होगी। जमीन की कमी की वजह से ग्रामीण इलाकों व अनधिकृत कॉलोनियों में 12 डीएसटीपी के निर्माण में देरी हुई है और गत सात साल से इन इलाकों का गंदा पानी सीधा यमुना में जा रहा है।

दिल्ली में रोजाना 76.8 करोड़ गैलन जलमल निकलता है जिनमें से केवल 63.2 करोड़ गैलन जलमल का शोधन राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद 35 एसटीपी में होता है।

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