नयी दिल्ली, 19 मई भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ ने 16 जून को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हो रहे न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की सराहना करते हुए शुक्रवार को कहा कि वाणिज्यिक कानून से लेकर संवैधानिक कानून तक के विभिन्न मामलों में उनकी विशेषज्ञता की कमी खलेगी।
उच्चतम न्यायालय के ग्रीष्मकालीन अवकाश के लिए 22 मई से बंद होने के कारण न्यायमूर्ति जोसेफ का अंतिम कार्य दिवस शुक्रवार रहा। इस मौके पर न्यायमूर्ति जोसेफ को विदाई देने के लिए बैठी रस्मी पीठ की अगुवाई करते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि इस तरह की पीठ की अध्यक्षता करना उनके लिए सम्मान की बात है, लेकिन इसके साथ कुछ भावुक क्षण भी हैं।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायमूर्ति जोसफ और वह बचपन के मित्र हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं अगस्त 1972 में दिल्ली आया था तो न्यायमूर्ति जोसफ पहले व्यक्ति थे, जो मेरे मित्र बने थे। इस बारे में मैं शाम को उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) के औपचारिक विदाई समारोह में विस्तार से अपनी बात रखूंगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं बार के युवा सदस्यों से सुनता हूं कि वे न्यायमूर्ति जोसेफ के समक्ष पेश होने को उत्सुक रहते हैं, क्योंकि वह उनकी बात धीरज से सुनते हैं।’’
इस मौके पर न्यायमूर्ति जोसेफ ने भी सीजेआई और बार के अन्य सदस्यों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ‘बार एवं बेंच’ दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी सहित बार के कई सदस्यों ने न्यायमूर्ति जोसेफ को उनके अंतिम कार्यदिवस पर शुभकामनाएं दीं।
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