ताइपे, 25 जून ताइवान के विदेश मंत्री जौशीह जोसेफ वू का कहना है कि दक्षिण चीन सागर में चीनी खतरा काफी बढ़ रहा है क्योंकि चीन ने इस क्षेत्र में युद्धपोतों और अन्य सैन्य साजो-सामान के अलावा बड़ी संख्या में सशस्त्र नौसैनिकों को तैनात किया है।
उन्होंने चुनौती से निपटने के लिए सभी हितधारकों से एकजुट प्रयास करने का आह्वान किया।
वू ने हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों का भी हवाला दिया, जिसमें पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमा और जिबूती में प्रमुख बंदरगाहों को नियंत्रित करने का प्रयास भी शामिल है।
ताइवानी विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि नयी दिल्ली इस मामले में करीबी नजर बनाए हुए है।
एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह के साथ बातचीत में ताइवान के विदेश मंत्री ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में दखल रखने वाले देशों को क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत से उत्पन्न चुनौती से निपटने के लिए हाथ मिलाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ताइवान चीनी खतरे से निपटने में अपना अनुभव साझा करने के लिए भी तैयार है।
इस दौरान वू ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, यूक्रेन में युद्ध के बाद भू-राजनीतिक उथल-पुथल और ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी सैन्य खतरों सहित विभिन्न मुद्दों पर टिप्पणी की।
ताइवानी विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘भारत को चीन से लगी उत्तरी सीमा पर भी खतरे का सामना करना पड़ रहा है। उसे न केवल सैन्य खतरा, बल्कि हिंद महासागर से भी भारत को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।’’
ताइवान के विदेश मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोकतांत्रिक देशों को चीन की साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए हाथ मिलाना चाहिए।
गौरतलब है कि चीन ताइवान के अपना क्षेत्र होने का दावा करता है।
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