रायपुर, 21 मार्च छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को आपातकाल (1975-77) के दौरान आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (मीसा) के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पेंशन और अन्य सुविधाएं देने के लिए विधेयक पारित किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव ने इस दौरान कहा कि राज्य में मीसा बंदियों (लोकतंत्र सेनानी) को पेंशन देने के लिए पहले से ही एक नियम है लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए एक कानून बनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे लोकतंत्र सेनानियों के हितों की रक्षा की जा सके।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने विधेयक पर आपत्ति जताई और सदन से बहिर्गमन किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन में ‘छत्तीसगढ़ लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक-2025’ पेश किया, जिसके बाद इस पर चर्चा की गई।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधेयक पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि क्या इस संदर्भ में कानून बनाने या चर्चा करने का अधिकार इस सदन को है?
उन्होंने कहा, “यह अधिकार राज्य सूची में शामिल नहीं है। लोक व्यवस्था राज्य सूची में शामिल है, लेकिन इसमें नौसेना, थलसेना, वायुसेना, संघ, कोई अन्य सशस्त्र बल या संघ के नियंत्रण में कोई अन्य बल शामिल नहीं है।”
महंत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 246 के अनुसार, जिन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकार के पास है, उनका उल्लेख संविधान की सातवीं अनुसूची के बिंदु क्रमांक दो में है और समवर्ती सूची का उल्लेख बिंदु क्रमांक तीन में है।
उन्होंने कहा कि इन दोनों सूचियों में ऐसा कोई विषय नहीं है, जिस पर इस विधेयक पर यहां विचार और चर्चा की जा सके।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कांग्रेस विधायक की आपत्ति पर पलटवार करते हुए कहा कि यह मुद्दा सामाजिक क्षेत्र से जुड़ा है, जो समवर्ती सूची में है और राज्य इस क्षेत्र से संबंधित कानून बना सकता है।
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