नयी दिल्ली, 18 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र, आप सरकार और भारतीय नर्सिंग परिषद से जवाब मांगा है।
इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी अस्पतालों में नर्सों को कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं मुहैया कराए जा रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने स्वास्थ्य मंत्रालय, दिल्ली सरकार और भारतीय नर्सिंग परिषद को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में नर्सों को ऐसी पीपीई किट दी जा रही हैं जिनका पहले इस्तेमाल हो चुका है
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पेश केंद्र सरकार के वकील अनिल सोनी ने अदालत के आदेश की पुष्टि की।
गैर-सरकारी संगठन ‘डिस्ट्रेस मैनेजमेंट कलेक्टिव’’ की याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में नर्सों के साथ केंद्र और दिल्ली सरकार का रवैया भेदभावपूर्ण है।
यह संगठन सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य पेशेवरों, वकीलों, सेवानिवृत्त नौकरशाहों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का समूह होने का दावा करता है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली नर्सिंग होम पंजीकरण अधिनियम, 1953 और 2011 के नियमों के तहत पंजीकृत निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों में नर्सों तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के मानवाधिकारों का "घोर उल्लंघन" हुआ है।
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