देश की खबरें | राज्यपाल की ओर से एकतरफा नियुक्त कुलपति ‘अवैध आगंतुक’ : बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु

कोलकाता, चार नवंबर पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार से परामर्श किए बिना राज्यपाल सी वी आनंद बोस द्वारा नियुक्त किये गए विश्वविद्यालयों के कार्यवाहक कुलपति ‘अवैध आगंतुक’ हैं।

बसु ने सीआईआई के सहयोग से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी से उन कार्यवाहक कुलपतियों को बाहर रखने के फैसले को उचित ठहराया। मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘राज्यपाल और उच्च शिक्षा विभाग के बीच चर्चा के बाद कुलपतियों की नियुक्ति की जानी चाहिए। उच्चतम न्यायालय राज्य सरकार को विश्वास में लिए बिना राज्यपाल द्वारा अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति को पहले ही अवैध करार दे चुका है।’’

उन्होंने कहा कि विभाग ने संगोष्ठी में केवल उन्हीं शिक्षाविदों को आमंत्रित किया है, जिनकी नियुक्ति कानून के मुताबिक हुई है। बसु ने कहा, ‘‘हमें नहीं लगता कि यहां किसी अवैध आगंतुक की जरूरत है।’’

राज्यपाल बोस राज्य के विश्वविद्यालयों के पदेन कुलाधिपति हैं। उन्होंने 16 विश्वविद्यालयों में कार्यवाहक कुलपतियों की नियुक्ति की है। ऐसे कई अन्य विश्वविद्यालयों में यह पद अभी भी खाली है।

यादवपुर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति बुद्धदेव साव द्वारा विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक बुलाने के बारे में पूछे जाने पर बसु ने ऐसे किसी भी कदम पर आपत्ति व्यक्त की।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि ईसी बैठक के बारे में हमसे परामर्श नहीं किया गया है, तो विश्वविद्यालय का यह कदम इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के निर्देश का उल्लंघन है। मैं फिर से देखूंगा कि क्या हमें सूचित किया गया है। अगर हम पाते हैं कि हमें सूचित नहीं किया गया है, तो हम इसे न्यायालय के संज्ञान में लाएंगे।’’

शीर्ष अदालत ने छह अक्टूबर को पश्चिम बंगाल में राज्य विश्वविद्यालयों के नव नियुक्त अंतरिम कुलपतियों के वेतन-भत्तों पर रोक लगा दी थी। पहले के एक फैसले में न्यायालय ने कहा था कि वह कुलपतियों को चुनने के लिए एक खोज समिति गठित करेगा।

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