देश की खबरें | राज्यसभा के सभापति ने आप के राघव चड्ढा के खिलाफ शिकायत को विशेषाधिकार समिति को भेजा

नयी दिल्ली, नौ अगस्त राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को कुछ सांसदों की उन शिकायतों को विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा ने नियमों का उल्लंघन करते हुए उनकी सहमति के बिना सदन की एक समिति में उनका नाम शामिल करने का प्रस्ताव किया।

राज्यसभा के एक बुलेटिन में कहा गया है कि सभापति को उच्च सदन के सदस्य सस्मित पात्रा, एस फान्गनॉन कोन्याक, एम थंबीदुरई और नरहरि अमीन से शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों में राघव चड्ढा पर अन्य बातों के साथ-साथ सात अगस्त को एक प्रस्ताव पेश करके प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों का उल्लंघन करते हुए उनकी सहमति के बिना उनके नाम शामिल करने का आरोप लगाया गया है।

चड्ढा ने राज्यसभा में 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023' को पारित कराने की प्रक्रिया के दौरान इसे प्रवर समिति के गठन का प्रस्ताव दिया था और इस समिति में शिकायत करने वाले उपरोक्त चार सांसदों के नाम शामिल किए थे।

राज्यसभा बुलेटिन में कहा गया है, ‘‘तथ्यों पर विचार करने के बाद राज्यसभा के सभापति ने राज्यसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के नियम 203 के तहत मामले को जांच और रिपोर्ट के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया है।’’

आम आदमी पार्टी (आप) ने चड्ढा का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और आरोप लगाया कि सरकार उनकी राज्यसभा सदस्यता समाप्त करना चाहती है।

आप नेता कहा, ''उनका लक्ष्य राघव चड्ढा की सदस्यता समाप्त करना है जैसा कि उन्होंने राहुल गांधी के साथ किया... हम डरे हुए नहीं हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पूरा मामला क्या है? क्या कोई सदस्य प्रवर समिति के लिए किसी का नाम सुझा सकता है? हाँ। क्या किसी हस्ताक्षर की आवश्यकता है? नहीं, राघव चड्ढा ने किसी विशेषाधिकार का उल्लंघन नहीं किया है।’’

चड्ढा ने चार अगस्त, 2023 को राज्यसभा सचिवालय को नोटिस दिया था कि वह 'राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2023' में संशोधन लाना चाहते हैं, जिसे राज्यसभा की प्रवर समिति के पास भेजा जाए, जिसमें चार सदस्यों सहित 19 सदस्य शामिल हैं।

विधेयक पर सात अगस्त को विचार किया गया था।

शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि चड्ढा ने नियमों का 'घोर उल्लंघन' करते हुए चार सदस्यों से सहमति नहीं ली थी।

उनमें कहा गया, ‘‘किसी विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव लाना और प्रवर समिति का सदस्य बनने के लिए सहमति देना सदन के सदस्यों का विशेषाधिकार है।’’

हालांकि, एक सदस्य को इस तरह के विवेक का प्रयोग करते समय अन्य सदस्यों को उपलब्ध समान विशेषाधिकारों को नीचा दिखाने और अवहेलना करने का कोई प्रयास करके प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

बुलेटिन में कहा गया है, ‘‘इस मामले में, चूंकि पीड़ित सदस्यों की सहमति कथित तौर पर कभी नहीं ली गई, इसलिए यह प्रथम दृष्टया नियमों और असंतुष्ट सदस्यों की गरिमा का घोर उल्लंघन प्रतीत होता है।’’

राज्यसभा बुलेटिन में यह भी कहा गया है, ‘‘सदन के एक सदस्य द्वारा अन्य सदस्यों के विशेषाधिकार क्षेत्र में इस तरह का उल्लंघन अनैतिक और अनुचित एवं कदाचार का गंभीर कृत्य है।’’

राज्यसभा की प्रवर समिति के संबंध में राज्यसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 72 में यह प्रावधान है कि किसी विधेयक पर प्रवर समिति के सदस्यों की नियुक्ति सदन द्वारा तब की जाएगी जब विधेयक को प्रवर समिति को भेजे जाने का प्रस्ताव किया जाएगा।

इसमें कहा गया, ‘‘किसी भी सदस्य को प्रवर समिति में नियुक्त नहीं किया जाएगा यदि वह समिति में सेवा करने का इच्छुक नहीं है। प्रस्तावक यह सुनिश्चित करेगा कि उसके द्वारा नामित किया जाने वाला प्रस्तावित सदस्य समिति में सेवा करने के लिए तैयार है या नहीं। प्रवर समिति में आकस्मिक रिक्तियों को परिषद में किए गए प्रस्ताव पर नियुक्ति से भरा जाएगा।’’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए आप सांसद द्वारा कथित 'धोखाधड़ी' की जांच की मांग की थी और सभापति से इस संबंध में आग्रह किया था।

उस समय पीठासीन उपसभापति हरिवंश ने सदन में घोषणा की थी कि चार सदस्यों द्वारा उनकी सहमति के बिना उनके नाम शामिल करने पर आपत्ति जताए जाने के बाद मामले की जांच की जाएगी।

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