देश की खबरें | केंद्र ने सेवा विवाद पर 11 मई के फैसले पर न्यायालय से पुनर्विचार का आग्रह किया

नयी दिल्ली, 20 मई केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया है कि वह दिल्ली में सेवा विवाद के मुद्दे पर 11 मई के अपने फैसले पर पुनर्विचार करे। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली सरकार के पास सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि मामलों को छोड़कर सेवाओं से संबंधित मामलों में विधायी और कार्यकारी शक्तियां हैं।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि निर्णय में त्रुटियां हैं और इसमें समीक्षा याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत मामले पर विचार नहीं किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 11 मई को एक सर्वसम्मत फैसले में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच विवाद को खत्म कर दिया था, जो 2015 की केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना से शुरू हुआ था।

इस अधिसूचना में सेवाओं पर केंद्र के नियंत्रण की बात कही गई थी और यह भी कहा गया था कि राष्ट्रीय राजधानी प्रशासन की प्रकृति अन्य केंद्रशासित प्रदेशों के विपरीत है तथा संविधान द्वारा इसे एक अद्वितीय दर्जा दिया गया है।

केंद्र ने शुक्रवार को दिल्ली में समूह-ए के अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापना के लिए एक प्राधिकरण बनाने के वास्ते अध्यादेश जारी किया था।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने कहा है कि केंद्र द्वारा लाया गया अध्यादेश उच्चतम न्यायालय के फैसले के साथ धोखा है।

पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि मामलों को छोड़कर अन्य सेवाओं का नियंत्रण दिल्ली की निर्वाचित सरकार को देने के न्यायालय के फैसले के एक सप्ताह बाद केंद्र का अध्यादेश आया।

अध्यादेश में दानिक्स कैडर से समूह-ए के अधिकारियों से संबंधित स्थानांतरण और अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण की स्थापना की बात कही गई है।

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