देश की खबरें | केंद्र को कॉलेजियम की सिफारिशों पर उचित समयसीमा में कार्रवाई करनी चाहिए

नयी दिल्ली, 25 मार्च उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र को उचित समय सीमा में कॉलेजियम की सिफारिशों पर जवाब देना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष न्यायालय ने लंबित मुकदमों में कमी के लिए उच्च न्यायालयों में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति का समर्थन किया।

प्रधान न्यायाधीश एस.ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कॉलेजियम की सिफारिशों पर केंद्र सरकार की ओर से कार्रवाई में देरी को लेकर संज्ञान लिया। इस पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी शामिल थे।

पीठ ने कहा कि प्रत्येक चरण की एक निश्चित विचार प्रक्रिया होती है और इसलिए ''एक उचित समय सीमा होनी चाहिए जिसमें केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय को कार्य करना चाहिए। कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद उन्हें उचित समय सीमा में जवाब देने की आवश्यकता है। ''

पीठ ने कहा कि कई ऐसी सिफारिशें हैं जो पिछले छह माह से सरकार के समक्ष लंबित हैं।

पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल के.के वेणुगोपाल से शीर्ष न्यायालय के कॉलेजियम की ओर से सुझाए गए नामों को मंजूरी देने को लेकर बयान देने को कहा।

वेणुगोपाल ने कहा कि वह सुनवाई की अगली तिथि पर इस पर जवाब देंगे।

पीठ ने एक गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी की ओर से दायर याचिका पर सभी उच्च न्यायालयों से संविधान के अनुच्छेद 224ए के तहत तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति की संभावनाओं को लेकर भी जवाब मांगा है। गैर सरकारी संगठन ने अपनी याचिका में लंबित मामलों के निपटारे के लिए अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की मांग की है।

उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में कुछ मुकदमों के 30 वर्षों से भी अधिक समय से लंबित होने का जिक्र करते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा कि तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति से लंबित मामलों की संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

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