नयी दिल्ली, 27 अगस्त केंद्र ने बृहस्पतिवार को जीएसटी राजस्व में आई कमी की भरपाई के लिये राज्यों को दो विकल्प दिये। इन विकल्पों के तहत राज्य बाजार से कर्ज उठा सकते हैं और राजस्व कमी की भरपाई कर सकते हैं। चालू चालू वित्त वर्ष में जीएसटी राजस्व प्राप्ति में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी का अनुमान लगाया गया है।
गैर-राजग शासित राज्यों की एक सुर में जीएसटी राजस्व की कमी की क्षतिपूर्ति की पुरजोर मांग के बीच केंद्र ने ये विकल्प दिये हैं।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की पांच घंटे चली बैठक के बाद कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण राजस्व में कमी बढ़ी है और इसकी भरपाई के लिये कर की दरें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
उन्होंने महान्यायवादी की कानूनी राय का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के अपने कोष से या बही-खाते के एवज में कर्ज लेकर कमी की भरपाई की संभावना को खारिज किया।
वित्त मंत्री ने कहा कि घाटे की भरपाई राज्य विशेष खिड़की का उपयोग करने के जरिये कर्ज लेकर कर सकते हैं। इस कर्ज को पांच साल बाद जीएसटी उपकर संग्रह से लौटाया जाएगा।
अगर राज्य इन विकल्पों में से किसी एक पर सहमत होते हैं, इसका मतलब होगा कि उपकर जीएसटी क्रियान्वयन के पांच साल बाद भी जारी रहेगा।
राज्यों के पास दूसरा विकल्प यह है कि वे क्षतिपूर्ति की पूरी राशि 2.35 लाख करोड़ रुपये विशेष उपाय के तहत कर्ज उठा लें।
वर्ष 2017 में 28 राज्य वैट समेत अपने स्थानीय करों को समाहित कर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने पर सहमत हुए थे। इसके एवज में केंद्र ने पांच साल तक राजस्व में किसी भी प्रकार की कमी की भरपाई का वादा किया था।
लेकिन अर्थव्यवस्था में नरमी के साथ चालू वित्त वर्ष में राजस्व कमी 2.35 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में यह कमी 70,000 करोड़ रुपये थी।
राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा कि इसमें से 97,000 करोड़ रुपये जीएसटी की कमी की वजह से जबकि शेष का कारण कोविड-19 का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव है।
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