नयी दिल्ली, 13 नवंबर केंद्र ने राज्यों और संघ शासित प्रदेशों से दिव्यांगजनों के स्वामित्व वाले अलग तरह के सवारी वाहनों के मामले में दी गई रियायतों और राहतों को उन्हें दिये जाने को कहा है। इस कदम का मकसद दिव्यांगों की आवाजाही को सुगम बनाना है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा, ‘‘दिव्यांगजनों की मदद के लिए मंत्रालय ने राज्यों/संघ शासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया है कि वे दिव्यांगजनों के स्वामित्व वाले अलग प्रकार के सवारी वाहनों के मामले में उपलब्ध कराई गई विभिन्न रियायतें और अन्य राहत उन्हें प्रदान करें।’’
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मोटर वाहन कानून के तहत अवैध सवारी वाहन से तात्पर्य ऐसे वाहन से जिसे किसी तरह की शारीरिक अपंगता से पीड़ित व्यक्ति के लिए डिजाइन और निर्मित किया गया है और इसका इस्तेमाल सिर्फ ऐसे व्यक्ति द्वारा ही किया जा रहा है।
पिछले महीने सरकार ने मोटर वाहन कानून में संशोधनों को अधिसूचित करते हुए पंजीकरण दस्तावेजों में स्वामित्व का ब्योरा शामिल किया था जिससे दिव्यांगजनों की आवाजाही को सुगम किया जा सके।
यह कदम इसलिए उठाया गया था क्योंकि मंत्रालय के संज्ञान में यह बात आई थी कि केंद्रीय मोटर वाहन कानून के तहत मोटर वाहनों के पंजीकरण के लिए जरूरी स्वामित्व का ब्योरा विभिन्न फॉर्म में उचित तरीके से नहीं दर्शाया जा रहा है।
संशोधित फॉर्म के तहत स्वामित्व का ब्योरा विभिन्न श्रेणियों मसलन स्वायत्त निकाय, केंद्र सरकार, परमार्थ न्यास, ड्राइविंग स्कूल, दिव्यांगजन, शैक्षणिक संस्थान, स्थानीय प्राधिकरण, बहु स्वामी और पुलिस विभाग में दर्ज किया जाएगा।
इसके साथ ही दिव्यांगजनों को सरकार की मोटर वाहनों की खरीद, स्वामित्व और परिचालन के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और अन्य रियायतें उपलब्ध कराई जाएंगी।
अजय
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