नयी दिल्ली, 17 जून केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने किसानों के लिए खाद के निर्यात और इस पर मिलने वाली सब्सिडी में कथित भ्रष्टाचार के सिलसिले में राजस्थान के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत और 14 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है और अग्रसेन के जोधपुर स्थित आवास एवं तीन राज्यों में 16 अन्य परिसरों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सीबीआई ने प्राथमिकी में गहलोत समेत 15 व्यक्तियों और कंपनियों को आरोपी बनाया है। उन्होंने कहा कि सीबीआई के 60 से अधिक अधिकारियों ने मामले में गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में 17 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की।
सीबीआई के अधिकारियों का एक दल छापेमारी के लिए जोधपुर के मंडोर में अग्रसेन गहलोत के आवास पर भी पहुंचा। सीबीआई ने प्राथमिकी में दीन दयाल वोहरा, अमृत लाल बंदी, बृजेश जयराम नाथ, नितिन कुमार शाह, सुनील शर्मा और प्रवीण सराफ सहित अन्य को भी आरोपी बनाया है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि उन्होंने हाल में सीबीआई के निदेशक, ईडी और आयकर विभाग के अध्यक्ष से मिलने का समय मांगा था। उन्होंने कहा, ‘‘13 जून को मिलने का समय मांगा गया, 15 जून को मामला दर्ज किया गया और 17 जून को छापेमारी की गई। यह क्या तरीका है, यह समझ से परे है?’’
गहलोत ने हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा, ‘‘अगर मैं दिल्ली में सक्रिय हूं या मैंने राहुल (गांधी) के आंदोलन में हिस्सा लिया है तो मेरे भाई से बदला क्यों लिया जाता है? जब 2020 में यहां हमारी सरकार में राजनीतिक संकट था, उस समय भी ईडी ने मेरे भाई के घर पर छापा मारा था।’’
धन शोधन के मामले में ईडी द्वारा राहुल गांधी से पूछताछ के खिलाफ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए गहलोत कई दिनों तक दिल्ली में थे।
अधिकारियों ने कहा कि अगर एजेंसी को मामले से संबंधित कोई नयी सामग्री मिलती है तो छापेमारी अभियान का विस्तार किया जा सकता है।
सीबीआई ने कहा है कि यह मामला पोटाश म्यूरेट (एमओपी) के आयात में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है, जिसे पोटेशियम क्लोराइड भी कहा जाता है। इसे सरकार द्वारा दी जाने वाली लगभग 80 प्रतिशत सब्सिडी पर किसानों को वितरित किया जाना था।
आरोप है कि 2007-09 के बीच किसानों के लिए मंगाए गए इस पोटाश म्यूरेट का निर्यात दक्षिण पूर्व एशियाई देशों, सऊदी अरब और अन्य बाजारों में ‘औद्योगिक सॉल्ट’ के रूप में किया गया था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि खाद पर सरकारी सब्सिडी भी संबंधित कंपनियों के बीच फर्जी लेनदेन के माध्यम से आरोपियों को मिली।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY