नयी दिल्ली, 27 नवंबर सीबीआई की विशेष अदालत ने नयी दिल्ली के सहकारी संघों के पूर्व रजिस्ट्रार आर के श्रीवास्तव और पूर्व उप-रजिस्ट्रार पदम दत्त शर्मा को जाली दस्तावेजों के आधार पर एक समिति को पुनर्जीवित करने के मामले में दो साल के कारावास की सजा सुनाई है। एजेंसी ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी।
एजेंसी ने कहा कि श्रीवास्तव और शर्मा पर 35,000 रुपये जुर्माना भी लगाया है। श्रीवास्तव भारतीय प्रशासनिक सेवा का आवकाश प्राप्त अधिकारी है।
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बयान में कहा गया है कि इस मामले में तीन अन्य लोगों सुभाष चंदर, मयंक गोस्वामी और अश्वनी शर्मा को भी चार-चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है और अलग-अलग राशि का जुर्माना लगाया गया है।
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर चंदर और अन्य के खिलाफ इस मामले की जांच को 26 अक्टूबर 2006 को अपने हाथों में ले लिया था। आरोप है कि चंदर ने जाली दस्तावेजों के आधार पर दिल्ली की श्री राधाकृष्णन को-ऑपरेशन ग्रुप हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड में जान फूंकने के लिये अधिकारियों के साथ साठ-गांठ की थी।
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जांच के दौरान सीबीआई ने पाया कि एजीएमयू कैडर के 1984 बैच के आईएएस अधिकारी श्रीवास्तव ने समिति में जान फूंकने के लिये पदम शर्मा और अन्य के साथ साजिश रची।
सीबीआई के प्रवक्ता आर के गौड़ ने कहा, ''एजेंसी ने 12 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। निचली अदालत ने पांच लोगों दोषी करार दिया और पांच को बरी कर दिया। दो आरोपियों की मौत हो चुकी है।''
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