नयी दिल्ली, 20 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार और उत्तर दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) से उस याचिका पर जवाब तलब किया जिसमें नगर निकाय के अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों के कोविड-19 महामारी के दौरान कई महीनों से लंबित वेतन का भुगतान करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
अस्पताल कर्मचारी संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने दिल्ली सरकार और एनडीएमसी को नोटिस जारी किया।
याचिका में कहा गया कि कोविड-19 महामारी के दौरान काम कई गुना बढ़ने के बावजूद नगर निकाय के अस्पताल और अस्पताल के प्रशासनिक विभाग में कार्यरत समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ के कर्मचारियों के वेतन का भुगतान अधिकारी समय पर नहीं कर रहे हैं जबकि इन कर्मचारियों को संक्रमण का सबसे अधिक खतरा है।
अस्पताल कर्मचारी संघ का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने कहा कि समूह ‘ग’ के कर्मचारियों को मई, जून और जुलाई महीने के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है जबकि समूह ‘घ’ के कर्मचारियों का जून और जुलाई महीने का वेतन बकाया है।
याचिका में कहा गया कि यह मामला कर्मचारियों के जीवन एवं जीविकोपार्जन के अधिकार से जुड़ा है और संविधान में कर्मचारियों के मिले अधिकार का उल्लंघन है।
गौरतलब है कि उत्तरी दिल्ली के पांच अस्पतालों- बाड़ा हिंदू राव अस्पताल, आरबीटीबी अस्पताल,संक्रामक रोग अस्पताल, कस्तूबा गांधी अस्पताल और गिरधर लाल प्रसूति अस्पताल-, 21 डिस्पेंसरी, 63 प्रसूति एवं बाल कल्याण केंद्र, 17 पॉलीक्लिनिक, सात प्रसूति गृह में करीब पांच हजार कर्मचारी कार्यरत हैं।
याचिका में दावा किया गया, ‘‘ पिछले पांच-छह साल से प्रतिवादी संख्या-एक (एनडीएमसी) की संबंधित कर्मचारियों को दो से तीन महीने की देरी से वेतन देने की आदत हो गई है। एनडीएमसी में देरी से वेतन देना गंभीर समस्या बन गई है।’’
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