देश की खबरें | बजट: नयी पहलों के साथ जलवायु लचीलापन को मजबूती प्रदान करेगा भारत

नयी दिल्ली, एक फरवरी सरकार ने शनिवार को केंद्रीय बजट 2025-26 में जलवायु लचीलापन और ऊर्जा परिवर्तन को मजबूती प्रदान करने के लिए नयी पहलों की घोषणा की, जिनमें राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन, उच्च उपज वाले बीज मिशन और परमाणु ऊर्जा मिशन शामिल हैं।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि भारत को जिस साहसिक और व्यापक जलवायु कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है, बजट में उस दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं देती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार सौर पैनल, ईवी बैटरी, पवन टर्बाइन और इलेक्ट्रोलाइजर बनाने में घरेलू उद्योगों को समर्थन देगी तथा साथ ही 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन की दिशा में काम करेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों (एसएमआर) में भी निवेश करेगी और सूखा, कीटों तथा बदलते मौसम से निपटने में किसानों की मदद करने के लिए बेहतर बीज विकसित करेगी।

सीतारमण ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों को विकसित करने में मदद करने के लिए एक राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन की भी घोषणा की।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘जलवायु-अनुकूल विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के मद्देनजर यह मिशन स्वच्छ तकनीक विनिर्माण को भी समर्थन देगा।’’

उन्होंने कहा कि इसका जोर सौर पीवी सेल, ईवी बैटरी, मोटर और कंट्रोलर, इलेक्ट्रोलाइजर, पवन टर्बाइन, उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन उपकरण और ग्रिड-स्केल बैटरी पर होगा।

स्थानीय उत्पादन को और अधिक समर्थन देने के लिए, कोबाल्ट पाउडर, लिथियम-आयन बैटरी स्क्रैप, सीसा, जस्ता और 12 अतिरिक्त महत्वपूर्ण खनिजों पर बुनियादी सीमा शुल्क हटा दिया गया है - यह जुलाई 2024 की नीति का अनुवर्ती कदम है, जिसमें 25 प्रमुख खनिजों को आयात शुल्क से छूट दी गई थी।

इस उपाय से लागत कम होने, कच्चे माल की आपूर्ति शृंखला सुरक्षित होने और अक्षय ऊर्जा तथा ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी’ क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसमें घरेलू विनिर्माण में निवेश को बढ़ावा देने और भारत में टिकाऊ ‘मोबिलिटी’ को बढ़ावा देने की भी क्षमता है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारतीय किसानों की मदद करने के लिए सरकार ‘उच्च उपज देने वाले बीजों पर राष्ट्रीय मिशन’ शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि यह मिशन अनुसंधान में सुधार करेगा और बेहतर बीज तैयार करेगा जो अधिक उपज दे सके, कीटों का प्रतिरोध कर सके और चरम मौसम की स्थिति में भी टिक सके।

सीतारमण ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के तहत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘20,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) के अनुसंधान और विकास के लिए एक परमाणु ऊर्जा मिशन स्थापित किया जाएगा। 2033 तक स्वदेशी रूप से विकसित कम से कम पांच एसएमआर चालू हो जाएंगे।’’

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए, सरकार परमाणु ऊर्जा अधिनियम और ‘सिविल लाइबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट’ में बदलाव करेगी।

जलवायु कार्यकर्ता एवं सतत संपदा क्लाइमेट फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक हरजीत सिंह ने कहा कि ईवी बैटरी निर्माण और कृषि में जलवायु लचीलापन बढ़ाने के संक्षिप्त उल्लेखों के अलावा, बजट में साहसिक और व्यापक जलवायु कार्रवाई की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं देती है, जिसकी भारत को तत्काल आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसमें अक्षय ऊर्जा को बढ़ाने, जानलेवा वायु प्रदूषण से निपटने, पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने और जलवायु संकट के मोर्चे पर समुदायों की सुरक्षा के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता का अभाव है। पर्यावरणीय क्षरण और बढ़ते जलवायु खतरों के बीच, हमें निर्णायक, परिवर्तनकारी कार्रवाई की जरूरत है....।’’

ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (जीईएपीपी) के उपाध्यक्ष सौरभ कुमार ने कहा कि इस साल का बजट भारत के अक्षय ऊर्जा में विश्व गुरु बनने के लक्ष्य पर आधारित है।

उन्होंने कहा, ‘‘सौर पीवी सेल और ग्रिड-स्केल बैटरी जैसी स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के घरेलू उत्पादन को राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन गति प्रदान करेगा। यह अक्षय ऊर्जा की तैनाती को बढ़ाएगा और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाएगा।’’

कुमार ने कहा, ‘‘निजी क्षेत्र द्वारा संचालित अनुसंधान, विकास और नवाचार को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करने से लोगों के वास्ते सकारात्मक ऊर्जा परिवर्तन के लिए अभिनव समाधान विकसित करने की हमारी क्षमता बढ़ेगी।’’

एनवायरनमेंट डिफेंस फंड के मुख्य सलाहकार हिशाम मुंडोल ने कहा, ‘‘2047 तक 100 गीगावाट सुरक्षित परमाणु ऊर्जा हासिल करना एक मजबूत लक्ष्य है।’’ एनवायरोकैटालिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा कि बजट में ऊर्जा क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने के वास्ते जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए कोई साहसिक बयान नहीं था।

उन्होंने कहा कि हालांकि, छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, सौर और बैटरी घटकों पर आयात शुल्क में कमी, ग्रिड बुनियादी ढांचे में निवेश, तथा पीएम-ई-बस, अटल मिशन फॉर रेजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉरमेशन (एएमआरयूटी) और स्वच्छ भारत जैसी पहल स्वागत योग्य कदम हैं।

अमित नेत्रपाल

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