देश की खबरें | पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह को मिली अंतरिम जमानत

नयी दिल्ली, 18 जुलाई दिल्ली की एक अदालत ने महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न मामले में मंगलवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के निवर्तमान प्रमुख और भारतीय जनता पार्टी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को दो दिन की अंतरिम जमानत दे दी।

अदालत ने यह देखते हुए राहत दी कि सिंह को जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया गया था और वह “बिना किसी दंडात्मक प्रक्रिया के” उसके सामने पेश हुए।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने सिंह को 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर राहत दी। अदालत ने मामले में डब्ल्यूएफआई के निलंबित सहायक सचिव विनोद तोमर को भी 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।

अदालत ने यह आदेश तब पारित किया जब दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करने वाले सरकारी वकील ने कहा कि भले ही आरोपपत्र बिना गिरफ्तारी के दाखिल किया गया है, फिर भी वह जमानत याचिकाओं का विरोध कर रहे हैं।

मजिस्ट्रेट ने कहा, “इस मामले में बिना गिरफ्तारी के ही आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी व्यक्तियों ने जांच में सहयोग किया है, आरोपी व्यक्ति आज अदालत के समन पर, यानी बिना किसी दंडात्मक प्रक्रिया के उपस्थित हुए हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि कथित अपराध में अधिकतम सात साल कैद की सजा हो सकती है।

न्यायाधीश ने कहा, “अभियुक्त व्यक्ति बुलाए जाने पर इस अदालत के समक्ष उपस्थित होने का वचन देते हैं और जमानत देने के लिए तैयार और इच्छुक हैं तथा जमानत की हर शर्त का पालन करने के लिए तैयार हैं। इन परिस्थितियों में, यह अदालत उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है।”

उच्चतम न्यायालय ने 2022 में फैसला सुनाया था कि जहां अपराध सात साल या उससे कम की सजा के साथ दंडनीय हो और आरोप पत्र गिरफ्तारी के बिना दाखिल किया गया है तथा आरोपी ने जांच में सहयोग किया है, जिसमें जब भी बुलाया जाए तो जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होना शामिल है, जमानत याचिकाओं पर अभियुक्त को भौतिक रूप से हिरासत में लिए बिना या जमानत आवेदन पर निर्णय होने तक उन्हें अंतरिम जमानत देकर निर्णय लिया जा सकता है।

न्यायाधीश ने कहा, “इसलिए, उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के मद्देनजर... आरोपी व्यक्तियों को 25-25 हजार रुपये की राशि के मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत राशि प्रस्तुत करने पर सुनवाई की अगली तारीख तक अंतरिम जमानत दी जाती है। जमानत बांड प्रस्तुत किए गए, सुनवाई की अगली तारीख तक इन्हें स्वीकार किया गया है।”

अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 20 जुलाई तय की है।

न्यायाधीश ने पुलिस को आरोप पत्र और अन्य दस्तावेजों की एक प्रति आरोपी को सौंपने का भी निर्देश दिया।

छह महिला पहलवानों और एक नाबालिग पहलवान द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद चर्चा में आए सिंह और तोमर जारी समन के अनुपालन में पहली बार अदालत में पेश हुए और मामले में जमानत का अनुरोध किया।

कई पदक विजेता पहलवानों, किसान समूहों और विपक्षी नेताओं के मुखर विरोध के बावजूद, सिंह को मामले में कभी गिरफ्तार नहीं किया गया, और उन्होंने लगातार सभी आरोपों को खारिज किया है।

सिंह के वकील ने ‘मीडिया ट्रायल’ का आरोप लगाया, जिस पर न्यायाधीश ने कहा कि वह उच्च न्यायालय या निचली अदालत के समक्ष एक आवेदन दायर कर सकते हैं। न्यायाधीश ने कहा, अदालत आवेदन पर उचित आदेश पारित करेगी।

सिंह की तरफ से हालांकि इस संदर्भ में मेट्रोपॉलिटिन अदालत में कोई आवेदन नहीं दिया गया।

इसके बाद अदालत ने सिंह और तोमर को बृहस्पतिवार तक अंतरिम जमानत दे दी, जब उनकी नियमित जमानत याचिका पर विचार किया जाएगा।

दिल्ली पुलिस ने छह बार के सांसद के खिलाफ 15 जून को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग), 354 ए (यौन उत्पीड़न), 354 डी (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप पत्र दायर किया था।

तोमर पर भादंसं की धारा 109 (किसी अपराध के लिए उकसाना), 354, 354ए और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाया गया था।

वर्तमान मामले के अलावा, एक नाबालिग पहलवान द्वारा लगाए गए आरोपों के मद्देनजर सिंह के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जो यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत थी। वह उन सात महिला पहलवानों में शामिल थी जिन्होंने सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

दोनों प्राथमिकी में, एक दशक से अधिक समय में अलग-अलग समय और स्थानों पर सिंह द्वारा अनुचित स्पर्श, छेड़छाड़, पीछा करना और धमकी जैसे यौन उत्पीड़न की कई कथित घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

नाबालिग पहलवान के पिता ने बाद में दावा किया था कि सांसद के खिलाफ उसके द्वारा लगाए गए आरोप “झूठे” थे और उनका इरादा लड़की के साथ कथित अन्याय को लेकर उनसे हिसाब बराबर करना था।

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