बेंगलुरु, 19 अक्टूबर पाकिस्तान की दो वर्षीय बच्ची अमायरा सिकंदर खान का बेंगलुरु के एक अस्पताल में सफलतापूर्वक अस्थि मज्जा प्रतिरोपण (बोन मैरो-बीएमटी) हुआ है।
कराची के रहने वाले क्रिकेट उद्घोषक सिकंदर बख्त की बेटी का हाल में नारायणा अस्पताल में बीएमटी की मदद से ‘‘म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस’’ टाइप-एक (एमपीएस-एक) का इलाज किया गया।
नारायण ‘हेल्थकेयर’ के अध्यक्ष और संस्थापक देवी शेट्टी ने बुधवार को कहा, ‘‘म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस’ एक ऐसी दुर्लभ स्थिति है, जिसमें आंखों और मस्तिष्क सहित शरीर के कई अंगों के कार्य करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।’’
चिकित्सकों ने बताया कि अमायरा (उम्र 2.6 साल) को उसके पिता के अस्थि मज्जा का उपयोग करके बचाया गया।
अस्पताल में बच्ची का इलाज करने वाले डॉ सुनील भट ने कहा कि ‘‘म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस’’ एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में एक किण्वक (एंजाइम) गायब हो जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘उस एंजाइम की कमी के कारण रोगी के शरीर में कई परिवर्तन होने लगते हैं, यकृत और प्लीहा बड़ा हो जाता है, हड्डियों में भी बदलाव देखने को मिलते हैं’’।
दरअसल, प्लीहा, रक्त कोशिकाओं के स्तर को नियंत्रित करता है। यह रक्त की जांच करता है और किसी भी पुरानी या क्षतिग्रस्त लाल रक्त कोशिकाओं को हटा देता है।
उन्होंने बताया, ऐसी दुर्लभ स्थितियों वाले अधिकांश बच्चे 19 वर्ष की आयु के होने तक विकलांग हो जाते हैं, और उनमें से ज्यादातर को जान गंवानी पड़ती है। इसलिए, अस्थि मज्जा प्रतिरोपण इसके संभावित उपचार में से एक है।
डॉ भट ने कहा, ‘‘लड़की के कोई भाई-बहन नहीं थे। हमने एक असंबंधित दाता की तलाश की, लेकिन वह भी उपलब्ध नहीं था। इसलिए हमने माता-पिता में से एक के अस्थि मज्जा को इस्तेमाल करने का फैसला लिया।’’
प्रतिरोपण के चार महीने बीत जाने के बाद चिकित्सकों ने पाया कि बच्ची स्वस्थ है और उसके एंजाइम ने सामान्य रूप से काम करना शुरू कर दिया है।
बच्ची की मां सदफ ने कहा कि उन्हें इस बीमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं है और उन्होंने काफी शोध करने के बाद डॉ भट से संपर्क किया था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY