देश की खबरें | बंबई उच्च न्यायालय ने जेजे अस्पताल को वधावन को उनकी चिकित्सा रिपोर्ट देने का निर्देश दिया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने सरकारी जेजे अस्पताल को निर्देश दिया कि वह पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक में करोड़ों रुपये के घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार एचडीआईएल प्रवर्तक राकेश वधावन को उनकी चिकित्सा संबंधी दस्तावेजों की प्रति दे।
मुंबई, आठ अगस्त बंबई उच्च न्यायालय ने सरकारी जेजे अस्पताल को निर्देश दिया कि वह पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक में करोड़ों रुपये के घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार एचडीआईएल प्रवर्तक राकेश वधावन को उनकी चिकित्सा संबंधी दस्तावेजों की प्रति दे।
न्यायमूर्ति आरडी धनुका और न्यायमूर्ति वीजी बिष्ट की खंडपीठ ने शुक्रवार को धनशोधन निषेध कानून (पीएमएलए) के तहत गठित विशेष अदालत से 19 अगस्त से पहले वधावन के आवेदन पर फैसला करने का निर्देश दिया। वधावन ने अपने आवेदन में निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति देने का आग्रह किया है।
मध्य मुंबई के आर्थर रोड जेल में बंद वधावन ने उच्च न्यायालय में दायर याचिका में लीलावती, नानावटी या क्रिटिकेयर जैसे अस्पताल में इलाज के लिए स्थनांतरित करने का अनुरोध किया।
वधावन के वकील अमित देसाई ने अदालत को बताया कि उनका मुवक्किल उच्च रक्तचाप, मुधेह, फेफड़ों की बीमारी, अनिद्रा सहित कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त है।
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देसाई ने आरोप लगाया कि जेल अधिकारी वधावन को सरकारी अस्पताल रेफर कर रहे हैं, लेकिन उन्हें चिकित्सा रिपोर्ट नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम वधावन को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करना चाहते हैं ताकि उनकी जान बचाई जा सके।’’
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने वकील हितेन वेनेगावकर के जरिये बताया कि इसी तरह का आवेदन वधावन ने सत्र अदालत में भी दाखिल किया है।
अतिरिक्त लोक अभियोजक प्रजक्ता शिंदे ने अदालत को बताया कि वधावन को केवल इंडोस्कॉपी प्रक्रिया कराने की जरूरत है जो नगर निकाय के केईएम अस्पताल में किया जा सकता है।
उन्होंने तर्क दिया कि वधावन के अन्य स्वास्थ्य सूचक ठीक हैं और उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की जरूरत नहीं है।
इसपर उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘ हम निर्देश देते हैं कि बिना विलंब सभी चिकित्सकीय दस्तावेज याचिकाकर्ता (वधावन) को दिया जाए जो उनके स्वास्थ्य और अबतक किए गए इलाज की जानकारी देते है।’’
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि राज्य और ईडी याचिकाकर्ता की मेडिकल रिपोर्ट सत्र न्यायालय के समक्ष पेश कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2019 में पीएमसी बैंक में कथित घोटाले का खुलासा तब हुआ जब रिजर्व बैंक ने करीब दिवालिया हो चुकी हाउसिंग डेवलपमेंट ऐंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को ऋण देने के लिए करीब 4,355 करोड़ रुपये संदिग्ध खाते में छिपाने का खुलासा किया।
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