दंगमाल (ओडिशा), 15 जून ओडिशा के भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान में बच्चों के लिए भारत के पहले नौका पुस्तकालय की शुरुआत की गई है।
यहां वन के प्रवेश द्वार पर स्थित एक नौका में बने इस पुस्तकालय को पांच जून से आम लोगों के लिए खोल दिया गया।
नौका को ईको-टूरिज्म परिसर में स्थापित किया गया है, ताकि भितरकनिका में आने वाले पर्यटकों के बच्चे और साथ ही साथ आसपास के स्कूलों के विद्यार्थी पुस्तकालय का उपयोग कर सकें।
भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान में बड़ी संख्या में खारे पानी के मगरमच्छ पाए जाते हैं।
उद्यान के संभागीय वन अधिकारी जे डी पाटी अन्य लोगों के साथ लंबे समय से नौका पुस्तकालय की योजना बना रहे थे।
उन्होंने कहा, ''पुस्तकालय बनाने के लिए इस्तेमाल की गयी नाव उन नावों में से एक है जिसे विभाग द्वारा मैंग्रोव वन और उसके वन्यजीवों की रक्षा के लिए वर्षों तक इस्तेमाल किए जाने के बाद छोड़ दिया गया है।''
इसे पुस्तकालय के उद्देश्य से दोबारा तैयार किया गया। किताबों को रखने के लिए इसके पतवार में एक कमरा बनाया गया है। ज़मीन से कमरे तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण किया गया है।
पाटी ने कहा, ''पुस्तकालय का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को प्रकृति से जोड़ना और उन्हें संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना है।''
उन्होंने परियोजना की अवधारणा और डिजाइन का श्रेय अपनी पत्नी और वन विभाग के अधिकारियों को दिया। पुस्तकालय में 1500 किताब हैं जिन्हें सरकार द्वारा संचालित भितरकनिका ईको-टूरिज्म एंड ईको-डेवलपमेंट सोसाइटी (बीईईडीएस) द्वारा वित्त पोषित किया गया है।
चूंकि इस समय पर्यटक नहीं आते, तो नौका पुस्तकालय क्षेत्र के स्थानीय बच्चों के लिए खुला है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय उद्यान हर साल एक मई से 31 जुलाई तक बंद रहता है।
पाटी ने कहा कि अभी के लिए, दो से तीन स्थानीय स्कूलों के बच्चों को पुस्तकालय में जाने की अनुमति होगी।
केंद्रपाड़ा जिले में भितरकनिका के राजनगर नागा नारायण सरकारी स्कूल के छात्र नौका पुस्तकालय के पहले दिन के आगंतुकों में से थे।
स्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र एस पी प्रियदर्शी बेहरा ने कहा, “हमने प्रकृति और पर्यावरण पर बहुत सी किताबें देखीं। एक नाव में बने पुस्तकालय में पढ़ना मजेदार था।”
स्कूल के विज्ञान विषय के शिक्षक ओमप्रकाश बारी ने कहा कि यह प्रयास नया है और उम्मीद है कि यह पर्यावरण एवं आर्द्रभूमि के प्रति बच्चों के बीच रुचि पैदा करेगा।
पाटी ने कहा कि नाव पुस्तकालय स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान सभी दिनों में खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि एक अगस्त से पर्यटन सीजन फिर से शुरू होने पर इसे आगंतुकों के लिए खोल दिया जाएगा और हर रविवार दो से तीन स्कूलों के छात्रों को पुस्तकालय में जाने की अनुमति होगी।
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