देश की खबरें | खुराना जैसे नेताओं के कारण भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनी: नड्डा

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने शनिवार को कहा कि विचारधारा और प्रतिबद्धता से कभी समझौता नही करने वाले मदनलाल खुराना जैसे उसके नेताओं के कारण ही केंद्र में सत्ताधारी पार्टी आज विश्व का सबसे बड़ा दल बना है।

उन्होंने भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं से खुराना के जीवन से सीख लेने की सलाह दी और कहा कि वह ऐसे नेता थे जो संघर्ष भी करते थे और समस्याओं का समाधान भी देते थे।

पहली बार आयोजित मदनलाल खुराना स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘जो भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है, उसे खुराना जैसे दिग्गज नेताओं ने स्थापित किया है, जिन्होंने कभी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया तथा लोगों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता जताई।’’

उन्होंने कहा कि खुराना के जीवन से प्रेरणा लेना ही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। नड्डा ने कहा कि खुराना कभी सत्ता के पीछे नहीं भागे बल्कि वह विचारधारा के प्रति समर्पित रहे और लोगों की सेवा की।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी पार्टी, हमारी विचारधारा, ये किसी के कहने से समाप्त नहीं होने वाली है। ये किसी के कहने से कमजोर नहीं होने वाली है। क्योंकि ऐसे दिग्गजों ने इसकी नींव रखी है, जो विचार पर अडिग रहे हैं, चलते रहे हैं।’’

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि खुराना ने कभी भी यह नहीं सोचा कि वह दिल्ली के मुख्यमंत्री भी बनेंगे क्योंकि उस समय तो पार्टी अपनी जमानत बचने पर खुश हो जाया करती थी।

उन्होंने कहा कि खुराना अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से भी जुड़े थे और वह तीन बार सांसद रहे। वे दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे और केंद्र सरकार में संसदीय कार्य मंत्री भी रहे। बाद में वे राजस्थान के राज्यपाल भी बने।

नड्डा ने कहा कि खुराना उन लोगों में से थे जिन्होंने आपातकाल के दौरान देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया और 19 महीनों तक जेल में भी बंद रहे।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में चाहे गरीबों को राशन कार्ड देना हो, जल निगम को स्थापित करना हो या यमुना पार को मुख्यधारा में लाना हो, खुराना ने दिल्ली के विकास के लिए कई कार्य किये।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने तब मेट्रो की बात की, जब मेट्रो के बारे में लोगों की समझ भी विकसित नहीं हुई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘खुराना लोगों के नेता थे। दिल्ली उनके दिल में बसी हुई थी। सच्चे अर्थों में कहें तो वे दिल्ली को जीते थे। उनके अथक प्रयासों से दिल्ली में 10 कॉलेज खुले और रिकॉर्ड समय में निर्माण के बाद इनका संचालन भी शुरू हुआ। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी भी बनाई।’’

ब्रजेन्द्र

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