देश की खबरें | असम विस की नयी इमारत का बिरला ने किया उद्घाटन

गुवाहाटी, 30 जुलाई असम विधानसभा को रविवार को स्थायी भवन मिल गया, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पारंपरिक डिजाइन और आधुनिक तकनीक के संयोजन से बने नए परिसर का उद्घाटन किया।

विधानसभा की कार्यवाही का संचालन पहले एक पुराने चाय गोदाम से हो रहा था, जिसमें 1972 में दिसपुर के असम की राजधानी बनने पर बैठकों के लिए बदलाव किया गया था।

बिरला ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हर गंभीर मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन राज्य विधानसभाओं और संसद में कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए क्योंकि लोगों को इन "लोकतंत्र के मंदिरों" से बहुत उम्मीदें हैं। बिरला की यह टिप्पणी मणिपुर हिंसा को लेकर संसद में जारी गतिरोध की पृष्ठभूमि में आयी है। उन्होंने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर सहमति और असहमति भारत के लोकतंत्र की विशेषता है।

बिरला ने कहा, ‘‘लोकतंत्र के मंदिर में हर गंभीर मुद्दे पर बहस, चर्चा, संवाद और बातचीत होनी चाहिए लेकिन राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में कोई व्यवधान या गतिरोध नहीं होना चाहिए।’’

अधिकारियों ने कहा कि नया विधानसभा परिसर 10 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और इसमें मुख्य भवन है, जिसमें प्रशासनिक और अन्य वर्गों के लिए सदन और उपभवन भवन होंगे।

उन्होंने कहा कि नये परिसर की परिकल्पना 2009 में की गई थी और इसकी शुरुआती लागत 234.84 करोड़ रुपये आंकी गई थी। उन्होंने कहा कि निर्माण में देरी और परिसर में नये घटक जुड़ने के कारण, संशोधित अनुमान 351 करोड़ रुपये रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह कागज रहित होगा और सितंबर में होने वाली सदन की अगली बैठक नये भवन में होगी।

नये सदन में 180 से अधिक सदस्यों के बैठने की क्षमता है। विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या 126 है।

बिरला ने कहा, ‘‘लोगों को राज्य विधानसभाओं और लोकसभा से बहुत उम्मीदें हैं। लोग आपको बहुत उम्मीद के साथ यहां भेजते हैं।’’ उन्होंने कहा, "यह मेरा अनुरोध है।"

उन्होंने कहा कि सदन में विधेयकों सहित हर मुद्दे पर गहन बहस और चर्चा लोगों के सर्वोत्तम हित में बेहतर परिणाम ला सकती है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि देश की सबसे पुरानी विधानसभाओं में से एक असम विधानसभा को नयी इमारत मिलना एक मील का पत्थर है।

शर्मा ने उम्मीद जतायी कि विधायक लोगों और राज्य के लिए काम करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा ने दशकों में कई महत्वपूर्ण कानून बनाए हैं।

शर्मा ने कहा, ‘‘असम विधानसभा देश की सबसे पुरानी और सबसे प्रतिष्ठित विधानसभाओं में से एक है। लोकतंत्र के मंदिर के रूप में इसने असम के लिए एक नया भाग्य लिखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा में सभी विधायकों का स्वस्थ आचरण असम के लोगों को प्रेरित करेगा। मुझे विश्वास है कि मेरे सभी सहयोगी लोकतंत्र की भावना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।’’

शर्मा ने कहा कि हालांकि इस इमारत को पूरा होने में समय लगा, लेकिन सरकार ने राज्य की विरासत को प्रतिबिंबित करते हुए इसे नवीनतम तकनीक से लैस करने की पूरी कोशिश की है।

उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा असम की सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करती है। कांच की छत, लकड़ी, वृंदावनी वस्त्र और ऐसी अन्य सामग्रियों से सुसज्जित, यह लोकतंत्र के एक मील के पत्थर के रूप में खड़ा है।’’

'वृंदावनी वस्त्र' असमिया बुनकरों द्वारा बुना गया एक कपड़ा होता है और यह असमिया संस्कृति का हिस्सा है।

शर्मा ने कहा कि यह ई-विधान सुविधा, उन्नत एवी प्रणाली, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्यमंत्री, मंत्रियों के लिए कक्ष और सभी दलों के लिए पर्याप्त जगह, उन्नत केंद्रीय हॉल आदि से सुसज्जित है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने इसे केंद्र की सेंट्रल विस्टा परियोजना के अनुरूप सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया है।’’

शर्मा ने पिछले कुछ वर्षों में विधानसभा द्वारा पारित विभिन्न कानूनों का भी उल्लेख किया जिनमें शैक्षणिक संस्थानों के लिए मार्ग प्रशस्त करना, व्यापार में सुगमता और राज्य के लोगों के हितों की सुरक्षा से संबंधित अन्य कानून शामिल हैं।

गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून का उल्लेख करते हुए, जो उनके पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद पारित किया गया था, शर्मा ने गांधीजी द्वारा कही गई बात का उल्लेख किया कि ‘‘मेरे लिए गाय का तात्पर्य सम्पूर्ण उपमानव संसार से है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि हम गांधीजी के सपनों को आगे बढ़ाते हुए इस प्रतिष्ठित विधानसभा से गोहत्या पर रोक लगाने का महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर सके।’’

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अपने भाषण में लोगों की समस्याओं पर चर्चा करने और उन्हें हल करने में विधानसभाओं और संसद की भूमिका पर जोर दिया।

असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी ने स्वतंत्रता-पूर्व दिनों से लेकर वर्तमान भौगोलिक क्षेत्र वाले असम के गठन के बाद राज्य विधानसभा की उत्पत्ति और इसके वर्तमान स्वरूप पर बात की।

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