देश की खबरें | जामनगर के आयुर्वेद संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बनाने के लिए विधेयक रास में पेश

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध एवं मौजूदा चुनौतियों के मद्देनजर इसे प्रासंगिक बनाने के मकसद से जामनगर स्थित आयुर्वेद संस्थानों को मिलाकर राष्ट्रीय महत्व के एक संस्थान का दर्जा देने के लिए मंगलवार को एक विधेयक राज्य सभा में पेश किया गया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नई दिल्ली, 15 सितंबर आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध एवं मौजूदा चुनौतियों के मद्देनजर इसे प्रासंगिक बनाने के मकसद से जामनगर स्थित आयुर्वेद संस्थानों को मिलाकर राष्ट्रीय महत्व के एक संस्थान का दर्जा देने के लिए मंगलवार को एक विधेयक राज्य सभा में पेश किया गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने ‘‘आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक 2020’’ को उच्च सदन में पेश किया जिसे लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। जामनगर स्थित गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न आयुर्वेद संस्थानों का विलय कर राष्ट्रीय महत्व का दर्जा प्रदान करने का प्रावधान इस विधेयक में किया गया है।

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तीन आयुर्वेदिक संस्थानों- स्नातकोत्तर आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान, गुलाबकुंवेरबा आयुर्वेद महाविद्यालय और आयुर्वेद औषधि विज्ञान संस्थान के विलय का विधेयक में प्रस्ताव किया गया है।

विधेयक को चर्चा के लिए रखते हर्षवर्धन ने कहा कि यह आयुर्वेद और संबद्ध क्षेत्रों में शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण में गुणवत्ता तथा उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए है।

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उन्होंने कहा, ‘‘यह आयुर्वेद के क्षेत्र में देश का पहला संस्थान होगा जिसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया जायेगा। यह सरकारी क्षेत्र में देश के सबसे पुराने संस्थानों में से एक है। आयुर्वेद अनुसंधान के संबंध में जो प्रकाशन हुए हैं उनमें से 10 प्रतिशत इसी संस्थान के हैं।’’

आयुर्वेद में स्नातकोत्तर शिक्षण और अनुसंधान संस्थान एकमात्र केंद्र है जो डब्ल्यूएचओ का सहयोगी केंद्र है और जहाँ स्नात्कोत्तर और शोध की सुविधा उपलब्ध है। इसने देश के लिए कई उपचार प्रोटोकॉल और दिशानिर्देश भी बनाए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐसे आयुर्वेद संस्थान को मान्यता देने का पहला मामला है, जो पहले ही अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर चुका है।’’

विधेयक पर चर्चा आरंभ करते हुए कांग्रेस सदस्य एल हनुमंतैया ने कहा कि आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है और इसका उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय चिकित्सकों द्वारा किया जाता है। हालांकि, अब इसे वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली से बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

हनुमंतैया ने आयुर्वेद प्रणाली का समृद्ध इतिहास रखने वाले केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों की ‘अनदेखी’ कर गुजरात के एक संस्थान को ऐसा दर्जा देने के कदम पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि ऐसा केवल गुजरात में ही क्यों है। केरल आयुर्वेद के मामले में पहले स्थान पर है। उन्होंने कहा, केरल का कोट्टक्कल आयुर्वेद जैसे संस्थान विश्व प्रसिद्ध हैं और जामनगर स्थित संस्थान से भी अधिक पुराने हैं।

गवर्नमेंट आयुर्वेद कॉलेज, तिरुवनंतपुरम जैसे संस्थानों की स्थापना 1889 में हुई, जबकि जामनगर स्थित शोध संस्थान 1952 में शुरू हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘केरल आयुर्वेद संस्थान को राष्ट्रीय महत्व क्यों नहीं दिया गया है। कर्नाटक में 68 आयुर्वेद कॉलेज और अनुसंधान संस्थान हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक, केवल गुजरात और जामनगर संस्थान में रुचि रखता है।’’

इसके अलावा, पारंपरिक सिद्धा चिकित्सा तमिलनाडु में लोकप्रिय है और इस तरह के राष्ट्रीय महत्व का एक संस्थान वहां होना चाहिए।

हनुमंतैया ने कहा कि देश भर में आयुर्वेद शिक्षा प्रणाली में शिक्षकों और शोध सुविधाओं की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर में आयुर्वेदिक उत्पादों का कारोबार 2022 तक लगभग 10 अरब डॉलर (लगभग 73,66 करोड़ रुपये) होने का अनुमान है।

प्रस्तावित संस्थान में आयुष मंत्री, आयुष के सचिव और गुजरात सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव सहित 15 सदस्यीय समिति होगी। समिति में तीन सांसद होंगे जिनमें दो लोकसभा से और एक राज्यसभा से होंगे।

उन्होंने कहा कि विधेयक में कहा गया है कि स्नात्कोत्तर शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक ही संस्थान के निदेशक और शासी निकाय के भी अध्यक्ष होंगे। मुझे संदेह है, जब मंत्री और सचिव शासी निकाय के सदस्य हैं तो निदेशक कैसे काम करेंगे।’’

विधेयक पर चर्चा अधूरी रही।

इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री हर्षवधन ने सहबद्ध और स्वास्थ्य देख-रेख वृत्ति विधेयक, 2018 को वापस लेने का प्रस्ताव किया जिसे सदन ने मंजूर कर लिया।

बाद में हर्षवर्धन ने राष्टूीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग विधेयक, 2020 पेश किया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में दिवाला और और शोधन अक्षमता संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2020 पेश किया।

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