नयी दिल्ली, 19 मई हिरोशिमा में जी7 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। जानकार सूत्रों ने यह जानकारी दी।
अगर मोदी और जेलेंस्की हिरोशिमा में मिलते हैं, तो यह पिछले साल फरवरी में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद दोनों नेताओं की पहली मुलाकात होगी। यूक्रेन की प्रथम उप विदेश मंत्री एमिन झापरोवा ने पिछले महीने भारत का दौरा किया था।
प्रधानमंत्री मोदी का जापान के अपने समकक्ष किशिदा फुमियो, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन सहित कुछ अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने का कार्यक्रम है।
प्रधानमंत्री मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच मुलाकात दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिकों के बीच कई बैठकों के बाद होने जा रही है।
मोदी शुक्रवार सुबह तीन देशों (जापान, पापुआ न्यू गिनी और ऑस्ट्रेलिया) की छह-दिवसीय यात्रा पर हिरोशिमा रवाना हुए। वह यहां जी7 शिखर सम्मेलन के तीन सत्रों में हिस्सा लेंगे। साथ ही, वह जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा सहित कई अन्य वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी जी7 शिखर बैठक में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं। वे जापान के निमंत्रण पर वहां आ रहे हैं, जो इस शक्तिशाली समूह की अभी अध्यक्षता कर रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव ओलेक्सी डेनिलोव ने कहा कि जेलेंस्की शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि वहां महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय होंगे, ऐसे में वहां अपने हितों की रक्षा के लिए उनकी मौजूदगी जरूरी होगी।
ज्ञात हो कि यूक्रेन की प्रथम उप विदेश मंत्री एमिन झापरोवा ने पिछले महीने भारत का दौरा किया था। यह यूक्रेन के खिलाफ रूसी हमला शुरू होने के बाद किसी प्रमुख यूक्रेनी नेता की भारत की पहली यात्रा थी। झापरोवा ने विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी को एक पत्र सौंपा था। यह पत्र जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम लिखा था।
यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद से मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके यूक्रेनी समकक्ष जेलेंस्की से फोन पर कई बार बात कर चुके हैं।
पिछले साल चार अक्टूबर को जेलेंस्की से फोन पर हुई बातचीत में मोदी ने कहा था कि यूक्रेन संकट का कोई ‘‘सैन्य समाधान’’ नहीं हो सकता है और भारत शांति स्थापना के किसी भी प्रयास में सहयोग देने के लिए तैयार है।
भारत ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की अभी तक निंदा नहीं की है। इसने हमेशा कहा है कि वार्ता और कूटनीति के जरिये इस संकट का समाधान निकाला जाना चाहिए।
दीपक
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