लखनऊ/कानपुर, पांच सितंबर उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले की एक विशेष अदालत ने तीन साल पहले चौबेपुर थाना क्षेत्र में हुए 'बिकरू कांड' के 23 अभियुक्तों को मंगलवार को 10 वर्ष कारावास की सजा सुनायी और उन पर 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने सात आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने एक बयान में मंगलवार को बताया कि कानपुर देहात के माती में अपर जिला सत्र न्यायाधीश-पंचम (विशेष अदालत गैंगस्टर एक्ट) दुर्गेश की अदालत ने चौबेपुर थाना क्षेत्र में हुए बिकरू कांड में गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) के तहत 30 अभियुक्तों में से 23 को 10-10 वर्ष कारावास की सजा सुनायी है जबकि सात आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। उन्होंने बताया कि अदालत ने इन 23 अभियुक्तों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) राजू पोरवाल ने बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश की अदालत ने जिन 23 आरोपियों को सजा सुनाई, उनमें गिरोह का मारा गया सरगना विकास दुबे का सहयोगी श्यामू बाजपेयी (35) और विका दुबे के कथित फाइनेंसर (धन का प्रबंधन करने वाला) जयकांत बाजपेयी उर्फ जय (37) का नाम शामिल हैं।
इसके अलावा हीरू दुबे उर्फ धर्मेंद्र (35), जहान यादव (49), दया शंकर अग्निहोत्री उर्फ कल्लू (47), इस्लाम बेग उर्फ बब्लू मुसलमान (40), रामू बाजपेयी उर्फ रवींद्र (35), शशिकांत पांडे उर्फ सोनू (32), शिवम दुबे उर्फ अजीत (24), गोविंद सैनी (35), उमाकांत उर्फ गुड्डन (48), शिवम दुबे उर्फ दलाल (23), धीरेंद्र कुमार द्विवेदी उर्फ धीरू (35), मनीष उर्फ बीरू (28), सुरेश वर्मा (55), गोपाल सैनी (30), शिव तिवारी उर्फ आशुतोष (34), विष्णु पाल उर्फ जिलेदार (48), राम सिंह यादव (35), वीर सिंह उर्फ नन्नू (32), छोटू शुक्ला (31), अखिलेश दीक्षित उर्फ श्याम (33) और राहुल पाल (27) को भी समान सजा सुनाई है।
उन्होंने बताया कि बरी किए गए लोगों में अरविंद त्रिवेदी उर्फ गुड्डन (46), सुशील कुमार तिवारी उर्फ सोनू (33), बाल गोविंद (52), राजेंद्र मिश्रा (49), रमेश चंद्र (58), संजय दुबे उर्फ संजू (48) और प्रशांत शुक्ला उर्फ डब्बू (47) शामिल हैं। गौरतलब है कि जुलाई 2020 में कानपुर जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। पुलिस की टीम बिकरू निवासी कुख्यात माफिया विकास दुबे को पकड़ने के लिए उसके घर दबिश देने गई थी।
पुलिस का आरोप है कि विकास दुबे और उसके सहयोगियों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी करके एक पुलिस उपाधीक्षक समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। पुलिस ने कहा था कि विकास दुबे 10 जुलाई को उस समय एक मुठभेड़ में मारा गया था जब उसे उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, रास्ते में पुलिस का एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और दुबे ने भागने की कोशिश की थी।
बिकरू कांड के बाद पुलिस द्वारा शुरू की गई व्यापक तलाशी के बाद, विकास दुबे के दो कथित सहयोगियों प्रेम प्रकाश पांडे और अतुल दुबे को पुलिस ने कानपुर में एक मुठभेड़ में मार गिराया था। पुलिस ने आठ जुलाई को 50 हजार रुपये के इनामी अमर दुबे को हमीरपुर जिले के मौदहा गांव में मार गिराया था। दुबे के दो और कथित सहयोगी- कार्तिकेय उर्फ प्रभात और प्रवीण उर्फ बउवा दुबे - कानपुर और इटावा जिलों में नौ जुलाई को अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए थे।
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