देश की खबरें | बिहार के करीब पांच हजार निजी स्वास्थ केंद्र कर रहे जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का उल्लंघन

पटना, 21 जुलाई बिहार में 5,226 निजी स्वास्थ्य केंद्रों (नर्सिंग होम या अस्पताल) की पहचान की गई है, जो जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 (बीएमडब्ल्यूएम-2016) का कथित उल्लंघन कर रहे हैं।

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) के मुताबिक ये केंद्र अपने खतरनाक बायोमेडिकल कचरे का निपटारा सामान्य कचरे के तौर पर कर रहे हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा होता है।

बीएसपीसीबी के अनुसार इसके अलावा राज्य के 15 जिलों के प्रशासनिक प्रमुख अपने-अपने क्षेत्रों में बीएमडब्ल्यूएम नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन में स्पष्ट रूप से कम रुचि दिखा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने 2016 में बीएमडब्ल्यूएम नियम अस्तित्व में आने के बाद से कोई बैठक नहीं की है।

बीएसपीसीबी ने बृहस्पतिवार को सभी 38 जिलों के प्रशासनिक प्रमुखों को पत्र भेजकर अपने-अपने ‘‘जिला स्तरीय निगरानी और कार्यान्वयन समिति’’ की नियमित आधार पर बैठकें करने और राज्य प्रदूषण बोर्ड को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा।

बिहार के जिन जिलों में पिछले छह वर्षों में बीएमडब्ल्यूएम के लिए गठित निगरानी और कार्यान्वयन समिति की कोई बैठक नहीं हुई है उनमें औरंगाबाद, बक्सर, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, गया, जमुई, कटिहार, किशनगंज, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, नालंदा, नवादा, पूर्णिया, रोहतास और शिवहर शामिल हैं।

इसके अलावा जिन जिलों में पिछले छह वर्षों में निगरानी और कार्यान्वयन समिति की केवल एक बैठक हुई वे हैं अररिया, (मई, 2019), अरवल (अक्टूबर, 2019), भोजपुर (अगस्त, 2021), गोपालगंज (अक्टूबर, 2017), कैमूर (सितंबर, 2019), लखीसराय (सितंबर, 2021), पटना (अक्टूबर, 2018), सहरसा (सितंबर, 2019) आदि।

बिहार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री नीरज कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-’ को बताया, ‘‘यह गंभीर चिंता का विषय है कि राज्य में 5,226 स्वास्थ्य केंद्र बीएमडब्ल्यूएम नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। हम इनके खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू करेंगे। यदि जैव चिकित्सा अपशिष्ट का प्रबंधन ठीक से नहीं किया गया,तो यह संक्रमण का उच्च जोखिम पैदा कर सकता है और खतरनाक हो सकता है।’’

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