जर्मनी की गठबंधन सरकार ने गुरुवार को अपनी सेना को मजबूत करने की नई योजना का ऐलान किया है. सरकार ने बताया कि लगभग 2 लाख 60 हजार सैनिकों और 2 लाख आरक्षित जवानों की नियुक्ति उनका लक्ष्य है.- वन्यजीव अभयारण्यों के एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर प्रतिबंध: सुप्रीम कोर्ट
- बांग्लादेश में संविधान सुधार के लिए लाए गए ’जुलाई चार्टर’ पर होगा जनमत संग्रह
- पाकिस्तानी मंत्री बोले, अफगान नागरिकों ने किए दो आत्मघाती बम धमाके
- जर्मन चांसलर पर सैन्य कर्ज को कल्याण योजनाओं में खर्च करने का आरोप
- 2024 में टीबी के चलते 12 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई: डब्ल्यूएचओ
- जेफ्री एप्सटीन के पुराने ईमेल से ट्रंप पर उठे नए सवाल
जर्मनी में सैन्य सेवा फिलहाल स्वैच्छिक ही रहेगी
जर्मनी की गठबंधन सरकार ने गुरुवार को अपनी सेना को मजबूत करने की नई योजना का ऐलान किया है. सरकार ने बताया कि लगभग 2 लाख 60 हजार सैनिकों और 2 लाख आरक्षित जवानों की नियुक्ति उनका लक्ष्य है. फिलहाल सेना में करीब 1 लाख 80 हजार सैनिक हैं.
सैनिकों की भर्ती के लिए अगले साल से सभी 18 साल के युवाओं को एक प्रश्नपत्र भेजा जाएगा, जिसमें उनसे उनकी सैन्य सेवा में रुचि और योग्यता के बारे में पूछा जाएगा. पुरुषों के लिए इसका जवाब देना अनिवार्य होगा, जबकि महिलाएं स्वेच्छा से भाग ले सकेंगी. जो लोग स्वेच्छा से सेना में शामिल होंगे, उन्हें हर महीने लगभग 2,600 यूरो का वेतन मिलेगा.
इस योजना में अनिवार्य सैन्य सेवा को दोबारा लागू करने की संभावना भी शामिल है. अगर लक्षित संख्या पूरी नहीं होती, तो सरकार अनिवार्य भर्ती लागू करने पर विचार करेगी. जरूरत पड़ने पर लॉटरी के जरिए युवाओं को चुना जा सकता है. सरकार ने साफ किया है कि कोई स्वचालित नियम नहीं होगा, यानी अनिवार्य भर्ती तभी लागू होगी अगर बाकी सभी उपाय नाकाम साबित हुए.
रूस और यूक्रेन के बीच 2022 से जारी युद्ध के बाद से जर्मनी में रक्षा तैयारियों को बढ़ाने पर चर्चा तेज हुई है. यूरोप में रूस से संभावित खतरे और अमेरिका से कमजोर होती सुरक्षा गारंटी के कारण जर्मनी अब अपने बलबूते पर सेना को मजबूत करना चाहता है.
जर्मनी में 2011 तक पुरुषों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा लागू थी, जिसे बाद उसे बंद कर दिया गया. ताजा सर्वेक्षणों के मुताबिक, देश के 54 प्रतिशत लोग इसकी वापसी का समर्थन करते हैं, खासकर बुजुर्ग वर्ग में समर्थन अधिक है. हालांकि कहा जा सकता है कि सेना में उनकी भर्ती होनी भी नहीं है, शायद इसलिए इस आयु वर्ग में ज्यादा समर्थन है. वहीं, युवा पीढ़ी में इसे लेकर झिझक और विरोध के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं.
लैंगिक न्याय सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं: सीजेआई गवई
भारतीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा है कि लैंगिक न्याय अकेले महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है, पुरुषों को भी इसमें अपना योगदान देना होगा. सीजेआई गवई ने यह बात बुधवार को 30वें ‘जस्टिस सुनंदा भंडारे मेमोरियल लेक्चर’ में कही, जिसकी थीम ‘सभी के लिए न्याय: लैंगिक रूप से समान और समावेशी भारत का निर्माण’ थी.
सीजेआई गवई ने अपने संबोधन में कहा कि पुरुषों को शक्ति के बंटवारे के बारे में सक्रिय रूप से सोचना होगा, खासकर उन्हें जो हमारे संस्थानों, कार्यस्थलों और राजनीति में ताकतवर पदों पर बैठे हैं. उन्होंने आगे कहा, “असली प्रगति तभी होगी जब पुरुष यह समझेंगे कि शक्ति को साझा करना नुकसानदेह नहीं है बल्कि यह समाज की आजादी है.”
लैंगिक न्याय का आशय लिंग के आधार पर होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करना और सभी लोगों के लिए समान अधिकार, अवसर और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, चाहे उनका लिंग कोई भी हो. इसमें महिलाओं और पुरुषों के अलावा, एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों को भी समान अधिकार और सम्मान देना शामिल है.
पाकिस्तानी मंत्री बोले, अफगान नागरिकों ने किए दो आत्मघाती बम धमाके
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान में इस हफ्ते अफगान नाागरिकों ने दो आत्मघाती बम धमाके किए हैं. नकवी ने संसद में कहा कि इस्लामाबाद और वजीरिस्तान में हुए आत्मघाती हमलों में शामिल दोनों हमलावरों की पहचान अफगान नागरिकों के तौर पर हुई है. उन्होंने कहा कि यह एक प्रमुख और गंभीर चिंता है. उन्होंने अफगान तालिबान पर पाकिस्तानी सेना पर हमला करने वाले चरमपंथियों का समर्थन करने का आरोप लगाया.
इस हफ्ते मंगलवार, 11 नवंबर को इस्लामाबाद में कोर्ट परिसर के बाहर आत्मघाती बम धमाका हुआ था, जिसमें 12 लोगों की मौत हुई थी और 27 लोग घायल हो गए थे. वहीं, एक अन्य हमलावर ने वजीरिस्तान जिले में विस्फोटकों से भरी गाड़ी मिलिट्री स्कूल के गेट में घुसा दी थी, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई थी. बाद में चरमपंथी स्कूल में भी घुस गए थे, जहां उनकी पाकिस्तानी सैनिकों के साथ मुठभेड़ हुई, जो करीब 24 घंटों तक चली.
यह भी पढ़ें- पाकिस्तान: 'ऑनर किलिंग' के पीड़ितों को कब्रिस्तान में भी नहीं मिलता सम्मान
वन्यजीव अभयारण्यों के एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर प्रतिबंध: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 13 नवंबर को आदेश दिया कि राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के एक किलोमीटर के दायरे में कोई भी खनन गतिविधि नहीं होगी. कानूनी मामलों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, "इस अदालत का लंबे समय से यह विचार रहा है कि संरक्षित क्षेत्र के एक किमी के दायरे में खनन गतिविधियां वन्यजीवों के लिए खतरनाक होंगी. गोवा फाउंडेशन के मामले में ये निर्देश गोवा राज्य के लिए जारी किए गए थे लेकिन हमें लगता है कि ऐसे निर्देश देशव्यापी स्तर पर जारी किए जाने चाहिए."
सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को उस मामले पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें झारखंड के सारंडा क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य और संरक्षण रिजर्व घोषित करने की मांग की गई थी. कोर्ट ने इस मांग के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसी घोषणा करने से क्षेत्र के आदिवासियों या वनवासियों के वन अधिकारों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार से कहा कि उन्हें तीन महीनों के भीतर इस क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को दी सुनवाई में वर्चुअली शामिल होने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने गुरुवार को वकीलों को सलाह दी कि वे दिल्ली में हवा की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वर्चुअल तरीके से सुनवाई में शामिल हों. जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कई वकीलों ने पहले से ही मास्क लगाए हुए हैं तो जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हो सकता है कि प्रदूषण से बचाव में मास्क पर्याप्त साबित ना हों.
दिल्ली में दीपावली के बाद से ही हवा की हालत बेकार बनी हुई है. गुरुवार, 13 नवंबर को दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 400 से अधिक दर्ज किया गया. दिल्ली के चांदनी चौक, वजीरपुर, रोहिणी, जहांगीरपुरी और अशोक विहार में एक्यूआई 450 के आसपास दर्ज किया गया. इसके चलते दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तहत, तीसरे चरण के प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं.
अमेरिका में स्टारबक्स यूनियन ने ‘रेड कप डे’ को बनाया विरोध दिवस, 65 स्टोरों पर हड़ताल
अमेरिका में स्टारबक्स यूनियन से जुड़े हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने गुरुवार को देशभर के 65 स्टोरों पर हड़ताल शुरू की है. यह कदम कंपनी के साथ श्रम समझौते में प्रगति ना होने के विरोध में उठाया गया है. हड़ताल का समय जानबूझकर रेड कप डे पर तय किया गया, जो स्टारबक्स के लिए साल के सबसे व्यस्त दिनों में से एक होता है. इस दिन कंपनी छुट्टियों के मौके पर विशेष पेय खरीदने वाले ग्राहकों को ऐसा मुफ्त कप देती है जिसमें रीफिल की संभावना होती है.
स्टारबक्स स्टोरों के यूनियन 'स्टारबक्स वर्कर्स यूनाइटेड' ने बताया कि न्यूयॉर्क, फिलाडेल्फिया, मिनियापोलिस, सैन डिएगो, सेंट लुईस, डलास, कोलंबस (ओहायो) और सिएटल समेत 45 शहरों के स्टोर इससे प्रभावित होंगे. यूनियन ने कहा कि हड़ताल की कोई तय समयसीमा नहीं है और अगर कंपनी अनुबंध पर सहमति नहीं बनाती तो और स्टोर भी आंदोलन में शामिल होंगे.
वहीं, स्टारबक्स ने कहा है कि अमेरिका में उसके अधिकांश स्टोर सामान्य रूप से खुले रहेंगे. कंपनी के देशभर में लगभग 10,000 अपने स्टोर और करीब 7,000 लाइसेंस प्राप्त स्टोर हैं, जिनमें सुपरमार्केट और हवाईअड्डों के आउटलेट भी शामिल हैं.
2024 में टीबी के चलते 12 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई: डब्ल्यूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ने बुधवार को बताया कि टीबी दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारी बनी हुई है. डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि पिछले साल टीबी के चलते दुनियाभर में करीब 12.30 लाख लोगों की जान गई. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, साल 2024 में टीबी के करीब एक करोड़ 70 लाख मामले सामने आए, जिनमें से करीब 12 लाख मामले बच्चों से जुड़े थे.
पिछले साल दुनियाभर में टीबी के जितने मामले सामने आए, उनमें से एक चौथाई मामले भारत के थे. इंडोनेशिया, फिलीपींस, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश भी टीबी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों की लिस्ट में शामिल हैं. टीबी की बीमारी एक बैक्टीरिया के चलते होती है, जो आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है. पर्याप्त इलाज के साथ टीबी को सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है.
बांग्लादेश में संविधान सुधार के लिए लाए गए ’जुलाई चार्टर’ पर होगा जनमत संग्रह
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने गुरुवार, 13 नवंबर को कहा कि ‘जुलाई चार्टर’ को लागू करने से पहले देश में जनमत संग्रह करवाया जाएगा. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरिम सरकार ने गुरुवार को ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर (संविधान सुधार) क्रियान्वन आदेश 2025’ को मंजूरी दी और कहा कि इसे जनमत संग्रह के परिणामों के आधार पर लागू किया जाएगा.
जुलाई चार्टर का उद्देश्य देश की राजनीति और संस्थानों को नया स्वरूप देना और जुलाई 2024 में हुए छात्र विद्रोह को संवैधानिक मान्यता प्रदान करना है. इसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना, प्रधानमंत्री के कार्यकाल को सीमित करना, राष्ट्रपति की शक्तियों को मजबूत करना, मौलिक अधिकारों का विस्तार करना और न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना शामिल है.
यूनुस ने कहा कि ये जनमत संग्रह अगले साल होने वाले संसदीय चुनावों के साथ ही करवाया जाएगा. उन्होंने यह भी दोहराया कि बांग्लादेश में आम चुनाव फरवरी, 2026 के शुरुआती 15 दिनों में करवाए जाएंगे और ये स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होंगे. उन्होंने कहा कि इससे सुधार की प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी.
गुरुवार को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने घोषणा की कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चल रहे मामले में 17 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी. शेख हसीना की गैर-मौजूदगी में चले इस मुकदमे में उन पर “मानवता के खिलाफ अपराध” के आरोप लगाए गए हैं. हसीना पिछले साल हुए विद्रोह के बाद भारत आ गई थीं और फिलहाल यहीं रह रही हैं.
फ्रीडम हाउस रिपोर्ट: जर्मनी में इंटरनेट की आजादी में आई गिरावट
फ्रीडम हाउस की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि जर्मनी में इंटरनेट की स्वतंत्रता में गिरावट आई है. वॉशिंगटन स्थित इस संस्था ने 2025 में 72 देशों में ऑनलाइन स्वतंत्रता का सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि कई पश्चिमी लोकतंत्रों में इंटरनेट पर बढ़ती पाबंदियों और सख्त नियमों के चलते आजादी घट रही है. जर्मनी का इंटरनेट स्वतंत्रता स्कोर तीन अंक गिरकर 74 हो गया है.
रिपोर्ट में जर्मनी के उन मामलों का जिक्र किया गया है, जहां अधिकारियों ने नेताओं की आलोचना करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की. इसमें मीम्स और सोशल मीडिया पोस्ट के कारण चलाए गए आपराधिक मुकदमे शामिल हैं. उदाहरण के तौर पर, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर रिपोर्ट करने वाले साप्ताहिक अखबार डॉएचलैंड कोरियर के एडिटर डेविड बेंडेल्स को एक पोस्ट के कारण निलंबित जेल और जुर्माने की सजा हुई, जिसमें उन्होंने पूर्व गृह मंत्री नैन्सी फैजर का मजाक उड़ाया था.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जर्मनी में इंटरनेट स्वतंत्रता घटने के कारणों में रूस से जुड़े हैकरों के हमले और दक्षिणपंथी हिंसक तत्वों के डर से खुद लागू की गई सेंसरशिप भी शामिल है. इन सभी कारकों ने ऑनलाइन स्वतंत्रता पर दबाव बढ़ा दिया है.
यूक्रेन पर दोहरी मार: रूस के बढ़ते हमलों के बीच देश में बड़े परमाणु ऊर्जा घोटाले के संकेत
रूस के नए हमलों के चलते यूक्रेन में ऊर्जा प्रणाली चरमरा रही है और सर्दियों के पहले कई क्षेत्रों में बिजली गुल हो रही है. इस बीच, यूक्रेन में एक परमाणु ऊर्जा कंपनी में बड़े घोटाले और घूसखोरी का मामला सामने आया है, जिससे शीर्ष अधिकारियों पर सवाल उठे हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के एक करीबी सहयोगी का नाम भी इसमें शामिल है.
जनता के दबाव के बाद जेलेंस्की ने न्याय और ऊर्जा मंत्रियों को बर्खास्त करने का आदेश दिया और बाद में दोनों मंत्रियों ने खुद ही इस्तीफा दे दिया. भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों ने 15 महीने की जांच में 1,000 घंटे की टेलीफोन जासूसी के बाद पांच लोगों को हिरासत में लिया और सात अन्य लोगों के लगभग 100 मिलियन डॉलर के घूसखोरी मामले में शामिल होने की आशंका जताई है.
यूक्रेनी अधिकारी यूरोपीय फंड जुटाने में जुटे हैं ताकि बढ़ती ऊर्जा कमी से निपटा जा सके. रूस के हमलों के चलते यूक्रेन की सेना कई इलाकों से पीछे हट रही है और चार साल से चल रहे इस युद्ध में आम जनता का मनोबल बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है.
जेफ्री एप्सटीन के पुराने ईमेल से ट्रंप पर उठे नए सवाल
अमेरिकी कारोबारी और यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन के एक पुराने ईमेल के सार्वजनिक होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों में आ गए हैं. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, बुधवार को जारी दस्तावेजों में सामने आया कि एप्सटीन ने 2019 में एक पत्रकार को भेजे ईमेल में लिखा था कि “ट्रंप लड़कियों के बारे में जानते थे.” हालांकि, यह साफ नहीं है कि एप्सटीन का इशारा किस बात की ओर था या यह बात उसके अपराधों से जुड़ी थी भी या नहीं. व्हाइट हाउस ने तुरंत डेमोक्रेट्स पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर ये ईमेल लीक कर राष्ट्रपति की छवि धूमिल करना चाहते हैं.
हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेट सदस्यों ने ट्रंप से जुड़े तीन ईमेल जारी किए हैं. इनमें से एक 2011 का है, जिसमें एप्सटीन ने अपनी सहयोगी गिसलेन मैक्सवेल को लिखा कि ट्रंप ने उसके घर पर एक नाबालिग लड़की के साथ “कई घंटे बिताए”. इन खुलासों ने ट्रंप और एप्सटीन की दोस्ती को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं और यह बहस फिर से छेड़ दी है कि ट्रंप को एप्सटीन के कथित अपराधों की जानकारी थी या नहीं.
डॉनल्ड ट्रंप ने अब तक एप्सटीन से जुड़े किसी भी अपराध की जानकारी होने से इनकार किया है और कहा है कि उन्होंने वर्षों पहले उससे संबंध तोड़ लिए थे. बुधवार को भी उन्होंने इस मुद्दे पर पत्रकारों से कोई सवाल नहीं लिया, जबकि उन्होंने पत्रकारों को ओवल ऑफिस में सरकारी शटडाउन खत्म करने वाले कानून पर हस्ताक्षर देखने के लिए बुलाया था.
जर्मन चांसलर पर सैन्य और ढांचे के कर्ज को कल्याण योजनाओं में खर्च करने का आरोप
जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स पर अर्थशास्त्रियों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने रक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए तय अरबों यूरो के नए कर्ज का बड़ा हिस्सा कल्याण योजनाओं और अन्य सामान्य खर्चों में लगा दिया है. बुंडेसबैंक और दो आर्थिक थिंक टैंक संस्थानों ने चेतावनी दी है कि सरकार की अतिरिक्त उधारी का एक बड़ा भाग ऐसे क्षेत्रों में गया है, जिन्हें सामान्य बजट से चलाया जाना चाहिए था, जैसे कर छूट या सब्सिडी.
मैर्त्स ने इस साल फरवरी में चुनाव जीतने के बाद सोशल डेमोक्रेट्स और ग्रीन पार्टी के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया था, जिसके तहत जर्मनी के संवैधानिक कर्ज सीमा नियम को रक्षा और ढांचा निवेश के लिए कुछ हद तक ढीला किया गया. इस कदम से अगले दस वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों में एक ट्रिलियन यूरो तक के निवेश का रास्ता खुला. इससे चार साल की आर्थिक सुस्ती के बाद जर्मनी की विकास दर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही थी.
हालांकि, जर्मन इकोनॉमिक इंस्टिट्यूट ने अपनी ताजा रिपोर्ट में ऐसी आशंका जताई है कि 2029 तक तय की गई अतिरिक्त उधारी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सामान्य बजट की कमी पूरी करने में इस्तेमाल किया जा सकता है. रिपोर्ट में लिखा गया है कि मैर्त्स की गठबंधन सरकार “नियमों को दरकिनार करने के लिए कई तरीकों का सहारा ले रही है,” जबकि इन निधियों का उपयोग केवल अतिरिक्त रक्षा और ढांचा निवेश के लिए किया जाना चाहिए. संसद में 2026 के बजट पर होने वाली वोटिंग से कुछ ही हफ्ते पहले आई इस रिपोर्ट ने जर्मन सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है.
कैलिफोर्निया ने 17 हजार प्रवासी चालकों के कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किए
अमेरिकी राज्य ने घोषणा की है कि वह 17 हजार कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने जा रहे हैं, जो उन प्रवासियों को दिए गए थे जिनकी अमेरिका में रहने की कानूनी अवधि समाप्त हो चुकी है. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, राज्य अधिकारियों ने बताया कि इन लाइसेंसों की समाप्ति तिथियां गलती से उन ड्राइवरों की कानूनी अनुमति से आगे बढ़ा दी गई थीं. हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया और अन्य राज्यों की आलोचना की थी, जो उनके मुताबिक, ऐसे लोगों को लाइसेंस जारी कर रहे थे जो देश में कानूनी रूप से रहने के पात्र नहीं हैं.
यह मुद्दा अगस्त में सुर्खियों में आया, जब एक ट्रक चालक, जिसे अमेरिका में रहने की अनुमति नहीं थी, उसने फ्लोरिडा में गलत यू-टर्न लिया जिस कारण एक सड़क हादसा हो गया. उसमें तीन लोगों की मौत हो गई. इसके बाद प्रवासी चालकों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर सवाल उठे. परिवहन सचिव शॉन डफी ने बुधवार (12 नवंबर) को कहा कि कैलिफोर्निया का यह कदम इस बात की स्वीकारोक्ति है कि राज्य ने गलती की थी.
डफी ने कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजम पर निशाना साधते हुए कहा, “कई हफ्तों तक यह दावा करने के बाद कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया, अब कैलिफोर्निया रंगे हाथ पकड़ा गया है. हमारी जांच के बाद गलत तरीके से जारी किए गए 17 हजार ट्रकिंग लाइसेंस अब रद्द किए जा रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा, “यह तो सिर्फ शुरुआत है. हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी अवैध प्रवासी अब सेमी-ट्रक या स्कूल बस के स्टीयरिंग पर ना हो.”
10 साल पहले के आतंकवादी हमलों की बरसी मना रहा है पेरिस
फ्रांस गुरुवार को 13 नवंबर 2015 को हुए आतंकवादी हमलों की दसवीं बरसी मना रहा है. इन हमलों में 130 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और 400 से ज्यादा घायल हुए थे. यह हमले तथाकथित “इस्लामिक स्टेट” संगठन से जुड़े आतंकियों ने पेरिस के कई स्थानों पर किए थे. पीड़ितों के संगठन लाइफ फॉर पेरिस के अध्यक्ष आर्थर देनूवो ने कहा, “हमारे लिए यह साल बहुत भावनात्मक और तनाव भरा है. हम अब भी उस दर्द में जी रहे हैं और उन लोगों को याद कर रहे हैं जो अब हमारे बीच नहीं हैं.”
देनूवो उसी रात बटाक्लां थिएटर में ‘ईगल्स ऑफ डेथ’ मेटल बैंड का कॉन्सर्ट देख रहे थे, जब तीन बंदूकधारियों ने अंदर घुसकर 90 लोगों की हत्या कर दी थी. आतंकियों ने इसके अलावा पेरिस की सड़कों पर कैफे में बैठे लोगों और स्टेड डी फ्रांस के बाहर भी हमला किया था, जहां फ्रांस और जर्मनी के बीच फुटबॉल मैच चल रहा था. देनूवो ने कहा, “सबसे मुश्किल 14 नवंबर की सुबह होती है, जब ऐसा दिखाना पड़ता है कि सब नॉर्मल है, जबकि दिल में अब भी वह दर्द में मौजूद है."
मुख्य श्रद्धांजलि समारोह पेरिस सिटी हॉल के पास बने नए स्मारक उद्यान में होगा, जहां राष्ट्रपति इमैनुएल माक्रों और मेयर ऐन इदाल्गो मौजूद रहेंगे. दोनों नेता उन छह स्थानों पर भी फूल चढ़ाएंगे जहां हमले हुए थे. पेरिसवासियों से अपील की गई है कि वे रिपब्लिक स्क्वायर और आइफिल टावर पर श्रद्धांजलि संदेश रखें. शाम को फ्रांस और यूक्रेन के बीच होने वाले विश्व कप क्वालिफायर मैच से पहले एक मिनट का मौन रखा जाएगा. इस बीच, हमले का एकमात्र जीवित आतंकी सलाह अब्देसलाम आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, जबकि 19 अन्य दोषियों को भी सजा सुनाई जा चुकी है.
इस्राएली राष्ट्रपति ने वेस्ट बैंक इलाके में फलस्तीनियों पर ‘सेटलरों’ की हिंसा की निंदा की
इस्राएल के राष्ट्रपति इसाक हरजोग और देश के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने वेस्ट बैंक इलाके में इस्राएली सेटलरों द्वारा फलस्तीनी लोगों पर किए हमलों की कड़ी निंदा की है. समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, मंगलवार को हुए इन हमलों को राष्ट्रपति हरजोग ने “चौंकाने वाला और गंभीर” बताया और कहा कि इस तरह की हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का यह व्यवहार “सीमा पार करना” है और सभी सरकारी एजेंसियों को मिलकर इस प्रवृत्ति को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए.
अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को दर्जनों नकाबपोश यहूदी सेटलरों ने वेस्ट बैंक के फलस्तीनी गांव- बेट लिड और दीर शरफ में तोड़फोड़ की, वाहनों और संपत्तियों में आग लगाई और बाद में इस्राएली सैनिकों से भी झड़प हुई. राष्ट्रपति हरजोग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्राएल के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इस तरह की हिंसा की आलोचना कम ही सुनने को मिलती है.
इसी बीच, इस्राएल ने दो महीने बाद गाजा पट्टी के उत्तरी हिस्से में बंद किए गए एक क्रॉसिंग पॉइंट को फिर से खोल दिया है. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया अब तेज होनी चाहिए. सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक सहायता मुख्य रूप से दक्षिणी और मध्य गाजा के दो रास्तों से भेजी जा रही है.













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