18 दिसंबर की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.- यूक्रेन की मदद के लिए ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ की अहम बैठक

- भारत ने विदेशी पेशेवरों के लिए वीजा जारी करने के नियमों में ढील दी

- लोकसभा में पास हुआ 'विकसित भारत-जी राम जी बिल'

- डोपिंग में लगातार तीसरे साल दुनिया में टॉप पर रहा भारत

- कर्नाटक में 'हेट स्पीच' के खिलाफ कानून पारित

- 2029 से यूट्यूब पर मुफ्त दिखेगा ऑस्कर समारोह

- सऊदी अरब ने वापस भेजे 56,000 पाकिस्तानी भिखारी

- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में होगी अब निजी कंपनियों की एंट्री, पारित हुआ 'शांति' बिल

भारत और बांग्लादेश यूरोपीय संघ के 'सुरक्षित देशों' की सूची में शामिल

यूरोपीय संघ (ईयू) ने 18 दिसंबर को एक ऐतिहासिक समझौते के तहत "सुरक्षित मूल देशों" की पहली वैश्विक सूची तैयार करने पर सहमति जताई है. इस सूची में भारत, बांग्लादेश, मोरक्को, ट्यूनीशिया, मिस्र, कोसोवो और कोलंबिया को शामिल किया गया है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन शरण चाहने वालों के आवेदनों को तेजी से निपटाना और उन्हें उनके देश वापस भेजना है, जिन्हें सुरक्षा कारणों से शरण देने के योग्य नहीं पाया गया है.

इस नए नियम के अनुसार, इन देशों से आने वाले लोगों को अब स्वचालित रूप से शरण नहीं मिलेगी, बल्कि उनके आवेदनों की त्वरित प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी. यूरोपीय संघ का मानना है कि इन देशों में कोई सामान्य उत्पीड़न या सशस्त्र संघर्ष नहीं है, इसलिए वहां के नागरिकों को शरण की आवश्यकता कम ही होती है. इसके अलावा, अल्बानिया, मोंटेनेग्रो और तुर्की जैसे यूरोपीय संघ की सदस्यता के उम्मीदवार देशों को भी सामान्य तौर पर सुरक्षित माना जाएगा.

यूरोपीय आयोग इन देशों की स्थितियों की निरंतर निगरानी करेगा. यदि किसी देश में स्थिति बिगड़ती है या कोई सशस्त्र संघर्ष शुरू होता है, तो उसकी सुरक्षित श्रेणी को अस्थायी रूप से निलंबित किया जा सकता है. हालांकि, प्रत्येक शरण आवेदन की व्यक्तिगत रूप से जांच अभी भी की जाएगी, लेकिन पूरी प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज होगी. यह सूची सभी सदस्य देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी होगी.

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में होगी अब निजी कंपनियों की एंट्री, पारित हुआ 'शांति' बिल

भारतीय संसद ने 18 दिसंबर को 'सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' (शांति) बिल को अपनी मंजूरी दे दी. राज्यसभा ने इस विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया, जबकि लोकसभा इसे बुधवार को ही पास कर चुकी थी. इस कानून का मुख्य उद्देश्य भारत के अब तक सरकारी नियंत्रण वाले नागरिक परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सके.

परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में बताया कि परमाणु ऊर्जा बिजली का एक विश्वसनीय स्रोत है, जो सौर या पवन ऊर्जा के विपरीत चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति कर सकता है. उन्होंने विकिरण (रेडिएशन) से जुड़ी आशंकाओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि भारत में अब तक जनता को रेडिएशन से संबंधित किसी भी खतरे की रिपोर्ट नहीं मिली है. सरकार ने यह भी कहा है कि परमाणु संयंत्रों के सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

भारत ने हाल के महीनों में परमाणु अनुसंधान और संबंधित गतिविधियों के लिए दो अरब डॉलर से अधिक की राशि खर्च करने की बात कही है. वर्तमान में भारत की 75 फीसदी से अधिक बिजली कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन से पैदा होती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. सरकार का लक्ष्य साल 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करना है, जो लगभग छह करोड़ घरों को बिजली देने के लिए पर्याप्त होगी. यह बिल भारत के 'नेट-जीरो' उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

सऊदी अरब ने वापस भेजे 56,000 पाकिस्तानी भिखारी

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने संगठित भीख मांगने और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के आरोपों के चलते पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ अपनी जांच और कार्रवाई तेज कर दी है. अकेले सऊदी अरब ने अब तक लगभग 56,000 पाकिस्तानियों को डिपोर्ट (देश निकाला) कर वापस भेज दिया है. पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि भीख मांगने के इस संगठित गिरोह और विदेश में बढ़ते अपराधों की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंच रहा है.

आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक सऊदी अरब ने 24,000, दुबई ने लगभग 6,000 और अजरबैजान ने करीब 2,500 पाकिस्तानी भिखारियों को वापस भेजा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूएई ने अधिकांश पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा प्रतिबंध लगा दिए हैं, क्योंकि वहां पहुंचने के बाद कई लोग आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाए गए थे.पाकिस्तानी जांच एजेंसी (एफआईए) ने बताया कि यह सिंडिकेट अब केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि अफ्रीका, यूरोप, कंबोडिया और थाईलैंड जैसे देशों के टूरिस्ट वीजा का भी गलत इस्तेमाल किया जा रहा है.

इस संगठित गिरोह और अवैध प्रवासन को रोकने के लिए पाकिस्तान सरकार ने भी घरेलू स्तर पर सख्ती बरती है. एफआईए के महानिदेशक रफत मुख्तार के अनुसार, साल 2025 में अब तक पाकिस्तानी एयरपोर्टों पर 66,154 यात्रियों को विमान से उतार दिया गया, ताकि उन्हें भीख मांगने या अन्य अवैध कार्यों के लिए विदेश जाने से रोका जा सके. पाकिस्तानी प्रशासन अब इन गिरोहों को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश कर रहा है ताकि खाड़ी देशों के साथ उनके संबंधों और वीजा नीतियों में और अधिक कड़वाहट न आए.

हिजाब विवाद: नीतीश कुमार के बचाव में आए जीतन राम मांझी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने की कोशिश करने वाला वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद गरमा गया है. इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री का बचाव किया है. मांझी ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि नीतीश कुमार की नीयत गलत नहीं थी और इस पूरी घटना को धार्मिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.

यह विवाद पटना में मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ, जहां नवनियुक्त आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटे जा रहे थे. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जब एक महिला डॉक्टर अपना प्रमाणपत्र लेने आई, तो नीतीश कुमार ने उसका हिजाब नीचे खींच दिया, जिससे महिला का चेहरा स्पष्ट दिखने लगा. इस घटना के बाद विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे महिला का अपमान बताते हुए भारी नाराजगी व्यक्त की है.

विपक्ष ने इस मुद्दे पर नीतीश कुमार की कड़ी आलोचना की है. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि जो नीतीश कुमार कभी धर्मनिरपेक्ष नेता माने जाते थे, अब उनका असली चेहरा सामने आ रहा है. वहीं, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की नेता सुमैया राणा ने इस मामले को लेकर लखनऊ के कैसरबाग थाने में नीतीश कुमार और यूपी के मंत्री संजय निषाद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने इसे अपमानजनक कृत्य बताते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

गाजा में बाढ़ से मौतें; एमनेस्टी ने इस्राएल को ठहराया जिम्मेदार

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गाजा पट्टी में मूसलाधार बारिश से हुई तबाही को पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली त्रासदी करार दिया है. संगठन का आरोप है कि ये मौतें गाजा में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए जरूरी सामानों की आपूर्ति पर इस्राएल द्वारा लगाई गई निरंतर पाबंदियों का नतीजा हैं.

एमनेस्टी की वरिष्ठ निदेशक एरिका ग्वेरा रोजास ने एक बयान में कहा कि बाढ़ में डूबे टेंट और ढहती इमारतों के लिए केवल 'खराब मौसम' को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, यह इस्राएल की उस नीति का परिणाम है जिसमें विस्थापितों के लिए आश्रय और मरम्मत सामग्री के प्रवेश को जानबूझकर रोका गया है.

गाजा में पिछले एक हफ्ते में कुछ हिस्सों में 9 इंच से ज्यादा बारिश हुई है, जिससे विस्थापितों के कैंप पानी में डूब गए हैं. इस आपदा में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें दो हफ्ते का एक नवजात बच्चा भी शामिल है. गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, उस बच्चे की मौत अत्यधिक ठंड (हाइपोथर्मिया) के कारण हुई. गाजा की लगभग 20 लाख आबादी इस समय टेंटों में रहने को मजबूर है, जो दो साल से चल रहे युद्ध के कारण पहले ही जर्जर हो चुके बुनियादी ढांचे के बीच गुजर-बसर कर रहे हैं.

यह मानवीय संकट 10 अक्टूबर को हुए संघर्ष विराम समझौते के बीच आया है. हालांकि, इस्राएल और हमास दोनों एक दूसरे पर इसके उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं. युद्ध विराम के बाद से अब तक गाजा में 370 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस्राएल से गाजा की नाकाबंदी को तुरंत हटाने और मानवीय सहायता के साथ साथ आवश्यक वस्तुओं और मरम्मत सामग्री की बिना बाधा पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है. संगठन का तर्क है कि मरम्मत सामग्री के अभाव में पहले से क्षतिग्रस्त इमारतें बारिश का दबाव नहीं झेल पा रही हैं.

2029 से यूट्यूब पर मुफ्त दिखेगा ऑस्कर समारोह

दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार ऑस्कर के प्रसारण को लेकर एक बदलाव होने जा रहा है. एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ने यूट्यूब के साथ एक बहु-वर्षीय समझौता किया है, जिसके तहत 2029 से ऑस्कर समारोह का विशेष वैश्विक प्रसारण यूट्यूब पर होगा. यह डील 101वें ऑस्कर समारोह से शुरू होकर 2033 तक चलेगी. फिलहाल, ऑस्कर के प्रसारण अधिकार एबीसी नेटवर्क के पास हैं, जो 2028 तक जारी रहेंगे.

इस साझेदारी की सबसे बड़ी बात यह है कि अब दुनिया भर के दर्शक ऑस्कर की मुख्य सेरेमनी, रेड कार्पेट और बिहाइंड द सीन्स कंटेंट को यूट्यूब पर बिल्कुल मुफ्त देख सकेंगे. एकेडमी का उद्देश्य इस मंच के जरिए वैश्विक स्तर पर अपनी पहुंच बढ़ाना है. यूट्यूब के आधुनिक फीचर्स जैसे मल्टी-लैंग्वेज ऑडियो ट्रैक्स (विभिन्न भाषाओं में सुनने की सुविधा) और क्लोज्ड कैप्शनिंग की मदद से ऑस्कर अब दुनिया के हर कोने में अधिक सुलभ होगा.

इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, यूट्यूब ने इस विशेष अधिकार को हासिल करने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं, जो नेटफ्लिक्स और एनबीसी यूनिवर्सल जैसे प्रतिद्वंदियों की बोलियों से कहीं अधिक है. एकेडमी के सीईओ बिल क्रेमर और यूट्यूब के भारतीय मूल के सीईओ नील मोहन ने इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे सिनेमा प्रेमियों की नई पीढ़ी को जोड़ा जा सकेगा और फिल्म इतिहास को एक अभूतपूर्व वैश्विक स्तर पर पेश किया जाएगा.

ताइवान को 11 अरब डॉलर के हथियार बेचेगा अमेरिका

अमेरिका ने ताइवान के लिए 11.1 अरब डॉलर (लगभग 93,000 करोड़ रुपये) के हथियार पैकेज को मंजूरी दे दी है, जो अब तक का सबसे बड़ा अमेरिकी रक्षा सौदा है. राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक टेलीविजन संबोधन में इसकी घोषणा की. अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि यह सौदा ताइवान की सेना के आधुनिकीकरण और उसकी आत्मरक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए किया गया है, जो अमेरिका के राष्ट्रीय और सुरक्षा हितों के भी अनुकूल है.

इस कदम से चीन के साथ तनाव और बढ़ने की पूरी संभावना है, क्योंकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है. यह घोषणा ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग की पिछले सप्ताह हुई गुप्त वॉशिंगटन यात्रा के तुरंत बाद हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पैकेज ताइवान पर चीन के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच उसे एक ठोस सुरक्षा कवच प्रदान करने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है.

इस विशाल पैकेज में हाईमार्स रॉकेट सिस्टम, हॉवित्जर तोपें, जैवलिन एंटी टैंक मिसाइलें और आधुनिक एल्टियस ड्रोन शामिल हैं. इसके अलावा, अमेरिका ताइवान को 1 अरब डॉलर से अधिक का सैन्य सॉफ्टवेयर और विभिन्न मिसाइलों के रखरखाव के उपकरण भी प्रदान करेगा. यह ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल का अब तक का सबसे बड़ा सैन्य फैसला है, जो ताइवान की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा.

कर्नाटक में 'हेट स्पीच' के खिलाफ कानून पारित

कर्नाटक विधानसभा ने 18 दिसंबर को 'हेट स्पीच और हेट क्राइम (रोकथाम) विधेयक, 2025' को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. बेलगावी में चल रहे सत्र के दौरान राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने इस बिल के प्रावधानों को विस्तार से समझाया. उन्होंने कहा कि समाज में समुदायों के बीच नफरत, दुश्मनी और वैमनस्य फैलाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचे की सख्त जरूरत थी. यह कानून किसी भी व्यक्ति (जीवित या मृत), समूह या संगठन के खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयानों और कार्यों को अपराध की श्रेणी में रखता है.

गृह मंत्री ने कानून की व्याख्या करते हुए बताया कि 'हेट स्पीच' का अर्थ नफरत फैलाना, उसे प्रकाशित करना, भड़काना या किसी विशिष्ट समुदाय को निशाना बनाना है. उन्होंने सदन में अखबारों की कतरनें दिखाते हुए उदाहरण दिया कि कैसे कुछ लोग समुदायों को एक दूसरे के खिलाफ भड़काने और हिंसा के लिए उकसाने वाले बयान देते हैं. अब इस तरह के बयानों को केवल राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि दंडनीय अपराध माना जाएगा.

सजा के प्रावधानों को लेकर इस बिल में कड़े नियम बनाए गए हैं. पहली बार अपराध करने वाले व्यक्ति को कम से कम एक साल की जेल होगी, जिसे 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है, साथ ही 50,000 रुपये का जुर्माना भी देना होगा. पहले अधिकतम सजा 10 साल प्रस्तावित थी, जिसे संशोधन के जरिए घटाकर 7 साल कर दिया गया है. अगर कोई व्यक्ति बार बार यही अपराध दोहराता है, तो उसके लिए न्यूनतम सजा दो साल और जुर्माना 1 लाख रुपये होगा.

बेल्जियम की शीर्ष अदालत ने मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण पर मुहर लगाई

बेल्जियम की शीर्ष अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत प्रत्यर्पित करने पर मुहर लगा दी है. चोकसी ने उसके प्रत्यर्पण के फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि चोकसी द्वारा उठाई गई आपत्तियों में दम नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रत्यर्पण की कार्यवाही में स्थानीय कानून और यूरोपीय मानवाधिकार मानकों का पूरी तरह से पालन किया गया है.

बेल्जियम की शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में लिखा कि भारत सरकार ने यह भरोसा दिलाया है कि चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा, जो दो कमरों और निजी शौचालय वाला सुरक्षित वार्ड है. कोर्ट के मुताबिक, इस दौरान चोकसी जांच एजेंसियों के नहीं बल्कि न्यायिक अदालतों के अधिकार क्षेत्र में रहेगा.

चोकसी को इसी साल अप्रैल में बेल्जियम पुलिस ने भारत सरकार के प्रत्यर्पण अनुरोध पर गिरफ्तार किया था. चोकसी पर 1.8 अरब डॉलर के कथित घोटाले में शामिल होने का आरोप है. सीबीआई और ईडी ने 2018 में पंजाब नेशनल बैंक के साथ लोन धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया था, जिसमें चोकसी के साथ उनके भतीजे नीरव मोदी को भी आरोपी बनाया गया था.

डोपिंग में लगातार तीसरे साल दुनिया में टॉप पर रहा भारत

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत लगातार तीसरे साल खेलों में प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर रहा है. साल 2024 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) द्वारा लिए गए 7,113 नमूनों में से 260 खिलाड़ी डोप टेस्ट में फेल पाए गए. यह संख्या अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक है. सूची में दूसरे स्थान पर मौजूद फ्रांस में 91 और तीसरे स्थान पर इटली में 85 मामले सामने आए हैं.

खेलों के आधार पर देखें तो एथलेटिक्स (76 केस) में सबसे ज्यादा डोपिंग पाई गई, इसके बाद वेटलिफ्टिंग (43) और कुश्ती (29) का नंबर आता है. हाल के महीनों में पेरिस ओलंपिक की क्वार्टर फाइनलिस्ट पहलवान रितिका हुड्डा का पॉजिटिव पाया जाना और यूनिवर्सिटी गेम्स के दौरान डोपिंग अधिकारियों को देखकर एथलीटों का मैदान छोड़कर भाग जाना, भारतीय खेल जगत की गंभीर स्थिति को दर्शाता है.

इस बीच, नाडा ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि उसने पिछले कुछ वर्षों में टेस्टिंग की संख्या और जागरुकता अभियानों में काफी वृद्धि की है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अब तक 7,068 टेस्ट किए जा चुके हैं, जिनमें से 110 मामले पॉजिटिव मिले हैं. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की चिंताओं को देखते हुए भारत सरकार ने नया 'नेशनल एंटी-डोपिंग बिल' भी पास किया है और भारतीय ओलंपिक संघ ने एक विशेष पैनल का गठन किया है ताकि खेलों में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित की जा सके.

लोकसभा में पास हुआ 'विकसित भारत-जी राम जी बिल'

लोकसभा ने 18 दिसंबर को'विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी वीबी-जी राम जी बिल को अपनी मंजूरी दे दी. यह नया बिल दो दशक पुराने 'मनरेगा' कानून की जगह लेगा. इस बिल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 के बजाय 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी. सरकार का लक्ष्य इसके जरिए ग्रामीण इलाकों में आय सुरक्षा बढ़ाना और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करना है.

बिल के पारित होने के साथ ही इसके फंडिंग पैटर्न (खर्च की हिस्सेदारी) में भी बड़ा बदलाव आया है. अब तक मनरेगा के तहत मजदूरी का 100 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाती थी और राज्यों पर भार मात्र 10 फीसदी के करीब रहता था. लेकिन नए 'जी राम जी' बिल के तहत इसे केंद्र प्रायोजित योजना बना दिया गया है. अब अधिकांश राज्यों को 60:40 के अनुपात में खर्च वहन करना होगा, यानी 60 फीसदी पैसा केंद्र देगा और 40 फीसदी राज्यों को अपनी जेब से खर्च करना होगा.

पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रखा गया है, जबकि बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों का पूरा खर्च केंद्र सरकार ही उठाएगी. कानून लागू होने के छह महीने के भीतर सभी राज्यों को नए नियमों के अनुसार अपनी योजनाएं तैयार करनी होंगी. बिल में एक खास प्रावधान 'एग्रीकल्चर पॉज' (कृषि अवकाश) का भी है, जिसके तहत बुआई और कटाई के सीजन के दौरान राज्य 60 दिनों तक इस योजना के काम को रोक सकते हैं, ताकि खेती के लिए मजदूरों की कमी न हो.

इस बदलाव को लेकर संसद में तीखी बहस भी हुई. विपक्ष ने आरोप लगाया कि 125 दिन की गारंटी के बहाने केंद्र सरकार आर्थिक बोझ राज्यों पर डाल रही है. वहीं, सरकार का कहना है कि बायोमेट्रिक हाजिरी, जीपीएस और एआई जैसी तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा व बुनियादी ढांचे का बेहतर निर्माण होगा.

भारत ने विदेशी पेशेवरों के लिए वीजा जारी करने के नियमों में ढील दी

भारत ने व्यावसायिक वीजा जारी करने के नियमों में ढील दी है, ताकि विदेशी इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी आसानी से भारत आ सकें. भारत के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने बुधवार रात को यह जानकारी दी. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इस कदम से भारत में काम करने वाली उन कंपनियों को फायदा होगा जो विनिर्माण सेवाओं के लिए चीनी पेशेवरों पर निर्भर हैं.

सरकार ने कहा है कि पिछले महीने उन्होंने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसके जरिए कंपनियां विदेशी पेशेवरों को बुलाने के लिए स्पॉन्सरशिप लेटर बना सकती हैं. सरकार ने कहा है कि उन्होंने वीजा आवेदन पत्रों को आसान बना दिया है और अब वे वीजा आवेदनों पर संबंधित मंत्रालयों से सलाह नहीं ले रहे हैं.

भारत में फैक्ट्रियों की स्थापना, उनकी शुरुआत, रखरखाव और उत्पादन समेत कई कार्यों में बेहतरी लाने के मकसद से वीजा नियमों में छूट दी गई है. भारतीय कंपनियां इन सेवाओं और स्थानीय कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए काफी हद तक चीनी पेशेवरों पर निर्भर रहती हैं, खासकर उन फैक्ट्रियों के लिए जहां चीनी मशीनरी का इस्तेमाल होता है.

यूक्रेन की मदद के लिए ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ की अहम बैठक

यूक्रेन को वित्तीय संकट से उबारने के लिए ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (ईयू) के 27 देशों के नेताओं का एक निर्णायक शिखर सम्मेलन शुरू हुआ है. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जब्त की गई रूसी संपत्तियों का इस्तेमाल यूक्रेन की मदद के लिए करना है. रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने चौथे वर्ष की ओर बढ़ रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से युद्ध खत्म करने के लिए समझौता करने का दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में यूरोपीय नेता चाहते हैं कि यूक्रेन की स्थिति को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए ताकि वह किसी भी बातचीत में कमजोर न पड़े.

यूक्रेन को अगले दो वर्षों तक अपना कामकाज चलाने के लिए लगभग 135 अरब यूरो की सख्त जरूरत है और माना जा रहा है कि अप्रैल 2026 से उसे पैसों की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है. जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि यदि यूरोपीय संघ इस बार नाकाम रहा, तो उसकी काम करने की क्षमता और अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता को आने वाले कई वर्षों के लिए गहरा नुकसान पहुंचेगा. उन्होंने इसे यूरोप के इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण बताया है.

हालांकि, बेल्जियम इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा है और उस पर अपनी आपत्ति वापस लेने का भारी दबाव है. दूसरी ओर, हंगरी ने यूरोपीय संघ द्वारा खुद फंड जुटाकर यूक्रेन को कर्ज देने की वैकल्पिक योजना को भी ठुकरा दिया है. चूंकि किसी भी बड़े फैसले के लिए सभी 27 सदस्य देशों की सर्वसम्मति जरूरी है, इसलिए यह शिखर सम्मेलन काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यूरोपीय देश आपसी मतभेदों को भुलाकर यूक्रेन के लिए कोई ठोस रास्ता निकाल पाएंगे.