जरुरी जानकारी | अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिये बैंक गारंटी की जगह ‘वचन पत्र’ दे सकेंगे बोलीदाता

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नयी दिल्ली, चार सितंबर सरकार ने शुक्रवार को कहा कि अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की सरकारी नीलामी में डेवलपर बैंक गारंटी की जगह इरेडा, पीएफसी या आरईसी से निर्गत ‘लेटर ऑफ अंडरटेकिंग’ भी पेश कर सकते हैं।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने कहा कि यह कदम कंपनियों के लिये कारोबार सुगमता में सुधार करेगा।

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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यदि डेवलपर देश में ही अक्षय ऊर्जा परियोजना विकसित कर रहे हों, तो भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) के द्वारा बयाना जमा (ईएमडी) के लिये बैंक गारंटी के बजाय भारतीय नवीकरणनीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (इरेडा), पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) या आरईसी लिमिटेड के द्वारा जारी वचन पत्र (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) को स्वीकार्य माने जाने को सिंह ने मंजूरी दे दी।

इरेडा, पीएफसी और आरईसी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा बिजली मंत्रालय के तहत आने वाले तीन गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (एनबीएफआई) हैं।

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सिंह के हवाले से बयान में कहा गया, ‘‘यह निर्णय ... आरई क्षेत्र में कारोबार करने में आसानी सुनिश्चित करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा, क्योंकि डेवलपर्स के पास अब एक और विकल्प होगा।’’

स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं की बोली लगाने के लिये एसईसीआई, एनटीपीसी, एनएचपीसी सरकारी नोडल एजेंसियां हैं।

एजेंसियों को लिखे पत्र में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि एसईसीआई, एनटीपीसी, एनएचपीसी या मंत्रालय की ओर से कोई अन्य कार्यान्वयन एजेंसी बयाना जमा के रूप में बैंक गारंटी या ‘पेमेंट ऑन ऑर्डर इंस्ट्रूमेंट’ स्वीकार कर सकती हैं।

भारतीय नवीकरणनीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (इरेडा), पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) या आरईसी लिमिटेड के द्वारा जारी वचन पत्र को ‘पेमेंट ऑन ऑर्डर इंस्ट्रूमेंट’ कहा जाता है।

मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के दस्तावेजों का उतना ही प्रभाव और वैसी ही मान्यता होगी, जितना कि किसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक द्वारा जारी बैंक गारंटी की होती है।

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