देश की खबरें | आरक्षण पर न्यायालय के फैसले के खिलाफ ‘भारत बंद’ : बिहार, झारखंड सबसे अधिक प्रभावित

नयी दिल्ली/पटना, 21 अगस्त उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण के संबंध में दिए गए फैसले के खिलाफ कुछ दलित और आदिवासी समूहों द्वारा आहूत एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल से बिहार और झारखंड के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के आदिवासी इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा।

देश के अन्य भागों में इसका प्रभाव मिलाजुला रहा। विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल कई दलों के साथ-साथ अन्य गैर-भाजपा संगठनों ने भी बंद को अपना समर्थन दिया था।

कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई ने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की ‘वैध मांगों’ पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए। हालांकि, भाजपा के प्रमुख आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते ने विपक्ष पर इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।

देश भर में 21 संगठनों ने शीर्ष अदालत के आदेश के खिलाफ ‘भारत बंद’ का आह्वान किया था। उनका कहना है कि इससे आरक्षण के मूल सिद्धांतों को नुकसान पहुंचेगा।

प्रदर्शनकारियों ने बिहार के कई जिलों में रेल और सड़क यातायात बाधित किया और पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठियों और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। दरभंगा और बक्सर में रेल सेवाएं बाधित रहीं, जबकि पटना, हाजीपुर, दरभंगा, जहानाबाद और बेगूसराय जिलों में सड़क यातायात बाधित रहा।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य सहयोगियों ने बंद को अपना समर्थन दिया। निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ ​​पप्पू यादव ने पटना और अन्य इलाकों में प्रदर्शनों का नेतृत्व किया और एससी/एसटी कोटे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के रुख की आलोचना की और आरोप लगाया कि वह आरक्षण को कमजोर करना चाहती है।

पटना में पुलिस ने डाक बंगला चौराहा पर यातायात अवरुद्ध करने वाली भीड़ को खदेड़ दिया। जहानाबाद जिले में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प के बाद पांच लोगों को हिरासत में लिया गया।

मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, सारण, बेगूसराय, हाजीपुर और पूर्णिया सहित अन्य जिलों में प्रदर्शनकारियों ने यातायात अवरुद्ध करने और टायर जलाने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें तितर-बितर कर दिया।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्रा ने पुष्टि की कि आरा, चौसा (बक्सर), दरभंगा, बेगूसराय और राजगीर में ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं, लेकिन स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया।

झारखंड में सरकारी बसें सड़कों से नदारद रहीं और स्कूल बंद रहे। यहां बंद के आह्वान को राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन का समर्थन प्राप्त था। वामपंथी दलों ने भी हड़ताल को अपना समर्थन दिया।

एक अधिकारी ने बताया कि हड़ताल के कारण मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को अपना पलामू दौरा रद्द कर दिया। उन्होंने बताया कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई।

हड़ताल के कारण रांची विश्वविद्यालय में शिक्षा में स्नातक (बी.एड) के विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा स्थगित कर दी गई।

कई लंबी दूरी की सरकारी बसें नहीं चलने के कारण दफ्तरों में उपस्थिति कम रही। प्रदर्शनकारियों ने रांची में कई जगहों पर टायर जलाए और नाकेबंदी की। बंद समर्थकों ने झारखंड की राजधानी में दुकानदारों से अपनी दुकानें बंद रखने का आग्रह किया। पलामू, गोड्डा, दुमका, गढ़वा और अन्य जिलों में सड़कें जाम की गयीं।

आदिवासी जन परिषद के अध्यक्ष प्रेम साही मुंडा ने कहा, ‘‘हम शीर्ष अदालत के फैसले का विरोध नहीं कर रहे हैं। हम संविधान द्वारा प्रदत्त अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हैं।’’

ओडिशा में रेल और सड़क संचार आंशिक रूप से प्रभावित हुआ, लेकिन सरकारी कार्यालय, बैंक, व्यापारिक प्रतिष्ठान और शैक्षणिक संस्थान सामान्य रूप से संचालित रहे।

प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए भुवनेश्वर और संबलपुर में रेलगाड़ियां रोक दीं, जबकि कुछ मार्गों पर यात्री बसें भी नहीं चलीं।

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर हड़ताल का मिलाजुला असर देखने को मिला। राज्य के बाकी हिस्सों में परिवहन सेवाएं काफी हद तक सामान्य रहीं।

बस्तर और सरगुजा संभाग के कुछ हिस्सों, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और धमतरी जिलों में कई दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बस्तर संभाग में सात जिले और सरगुजा संभाग में छह जिले शामिल हैं।

दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में सर्व आदिवासी समाज (एसएएस) के सदस्यों द्वारा बंद के समर्थन में एक विशाल मोटरसाइकिल रैली निकाली गई। आदिवासी संगठनों के एक छत्र संगठन एसएएस की आदिवासी इलाकों में अच्छी उपस्थिति है।

विपक्षी कांग्रेस ने बंद को अपना ‘नैतिक’ समर्थन दिया तथा एसटी एवं एससी समुदायों के सदस्यों की चिंताओं को दूर करने का आह्वान किया।

प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रकोष्ठ के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, ‘‘अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों और उनके संगठनों ने अपनी जायज मांगों को लेकर ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है, जिस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि यह उनका संवैधानिक अधिकार है। कांग्रेस उनके आंदोलन का नैतिक समर्थन करती है।’’

मध्य प्रदेश की मंडला (एसटी सुरक्षित) लोकसभा सीट से भाजपा सदस्य कुलस्ते ने कहा, ‘‘न्यायाधीशों ने अपनी राय दे दी है। मैं व्यक्तिगत रूप से 60-70 सांसदों के साथ इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिला था। प्रधानमंत्री ने हमें बताया कि एससी और एसटी के बीच क्रीमी लेयर प्रावधान लागू नहीं किया जाएगा।’’

कुलस्ते ने कहा,‘‘सरकार की इतनी स्पष्टता और निर्णय के बावजूद लोगों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है... वे राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस ने एससी और एसटी के नाम पर राजनीति की और (बहुजन समाज पार्टी प्रमुख)मायावती भी वही कर रही हैं।’’

राष्ट्रव्यापी हड़ताल का गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में भी कुछ असर रहा, जिसमें छोटा उदयपुर, नर्मदा, सुरेन्द्रनगर, साबरकांठा और अरावली जिले शामिल हैं। इन जिलों के शहरों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बाजार बंद रहे।

सुरेन्द्रनगर जिले के वधवान तालुका में प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए एक मालगाड़ी रोकी और नारेबाजी की। अरावली जिले के भिलोदा और शामलाजी में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं। अधिकारियों ने बताया कि बंद को जबरन लागू करने की कोशिश कराने के आरोप में पाटन और अरावली जिलों में कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

सूरत जिले के उमरपाड़ा कस्बे में दोपहर में दुकानें बंद रहने के कारण सन्नाटा पसरा रहा।

हड़ताल के आह्वान का उत्तर प्रदेश में सामान्य जनजीवन पर बहुत कम असर देखने को मिला क्योंकि दुकानें खुली रहीं और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राज्य के बड़े हिस्से में कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा।

विपक्षी बहुजन समाज पार्टी (बसपा)और समाजवादी पार्टी (सपा) ने बंद को अपना समर्थन दिया है। बसपा कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज के पास प्रदर्शन किया, जिससे कुछ देर के लिए यातायात प्रभावित हुआ।

भीम आर्मी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया जहां इसकी अच्छी खासी मौजूदगी है।

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और नगीना से लोकसभा सदस्य चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज का जनांदोलन केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अब बहुजन समाज फूट डालो और राज करो की साजिश को सफल नहीं होने देगा।’’

राजस्थान, पंजाब और हरियाणा सहित अन्य उत्तरी राज्य, कुछ स्थानों को छोड़कर, बड़े पैमाने पर बंद से अप्रभावित रहे। कुछ जगहों पर बाजार बंद रहे और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित रहीं।

राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) यू आर साहू ने कहा, ‘‘पूरे राज्य में एक-दो छिटपुट घटनाओं को छोड़कर कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई। पुलिस एवं प्रशासन के साझा माकूल इंतजामों की वजह से बंद शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।’’

जयपुर में एससी/एसटी संयुक्त संघर्ष समिति ने एक अगस्त के उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ रैली निकाली। जयपुर व्यापार महासंघ के महासचिव सुरेश सैनी ने कहा, ‘‘रैली के दौरान बाजार बंद रहे और अपराह्न तीन बजे के बाद खुले। बंद शांतिपूर्ण रहा।’’

पंजाब और हरियाणा में दुकानें और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान सामान्य रूप से खुले, क्योंकि दोनों राज्यों में पुलिस ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे।

फगवाड़ा में कुछ शिक्षण संस्थानों को उनके प्रबंधन ने एहतियात के तौर पर बंद कर दिया। फगवाड़ा, जालंधर और होशियारपुर जिलों में विरोध मार्च निकाले गए। लुधियाना में स्कूल सामान्य रूप से खुले।

असम में बंद का कोई असर नहीं देखा गया, जहां पूरे राज्य में स्कूल, कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सामान्य रूप से खुले रहे और लगभग पूरी उपस्थिति रही।

उच्चतम न्यायालय ने एक अगस्त के आदेश में कहा कि राज्यों को संवैधानिक रूप से अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का अधिकार है, जो सामाजिक रूप से विषम वर्ग का निर्माण करते हैं, ताकि उन जातियों के उत्थान के लिए आरक्षण दिया जा सके जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी हैं।

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