देश की खबरें | उल्फा (आई) से पहले केंद्र से वार्ता समर्थक धड़े से बातचीत पूरी करने का आग्रह: सरमा

दुलियाजान (असम), चार जनवरी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया है कि वह परेश बरुआ के नेतृत्व वाले उल्फा (इंडीपेंडेंट) के साथ बातचीत शुरू करने से पहले उल्फा के वार्ता समर्थक धड़े के साथ चल रही शांति वार्ता को पूरा करे।

सरमा ने उल्फा (आई) के साथ शांति की फिर से पेशकश की और उग्रवादी संगठन से आगामी गणतंत्र दिवस पर बंद का आह्वान नहीं करने की अपील की।

सरमा ने यहां पुलिस अधीक्षकों के दो दिवसीय सम्मेलन की समाप्ति पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘असम सरकार उल्फा के वार्ता समर्थक धड़े के साथ बातचीत नहीं कर रही है। केंद्र सीधे उनके संपर्क में है। लेकिन मैंने केंद्र सरकार से उल्फा (आई) के साथ बातचीत शुरू करने से पहले उस धड़े के साथ बातचीत पूरी करने के लिए एक अनौपचारिक अनुरोध किया है।’’

सरमा ने कहा, ‘‘यदि नगालैंड की तरह बातचीत में एक ही संगठन के बहुत सारे धड़े हैं, तो यह बहुत जटिल हो जाता है।’’

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही उल्फा के वार्ता समर्थक धड़े के नेताओं ने उनके मुद्दों को हल करने में केंद्र की ‘‘ईमानदारी’’ पर संदेह जताया था। वार्ता समर्थक गुट ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से उसके साथ शांति वार्ता में "ज्यादा प्रगति" नहीं हुई है, हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई थी।

उल्फा (आई) के साथ शांति वार्ता पर सरमा ने कहा कि संवाद के रास्ते खुले हैं। उन्होंने कहा, ‘‘उल्फा मुद्दा एक जटिल मुद्दा है जो एक लंबी अवधि तक खिंचा और इसमें कई लोग हताहत हुए। दोनों पक्षों की मजबूरियां हैं जिससे इसके समाधान में देरी हो रही है।"

पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर बंद आहूत नहीं करने और मई से संघर्षविराम में रहने के लिए उल्फा (आई) की सराहना करते हुए सरमा ने संगठन से गणतंत्र दिवस पर भी बंद आहूत नहीं करने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने 10 मई को शपथ लेने के बाद उल्फा (आई) से शांति वार्ता के लिए आगे आने और राज्य में 42 साल पुराने उग्रवाद को हल करने की अपील की थी।

संगठन के कट्टर धड़े ने उसी महीने तीन महीने के लिए एकतरफा संघर्षविराम की घोषणा के साथ जवाब दिया था, जिसे वह तब से बढ़ाता आ रहा है।

सरमा ने एकतरफा संघर्षविराम को ‘सकारात्मक कदम’ करार देते हुए कहा कि सरकार ने भी पिछले आठ महीने में संगठन के साथ किसी भी 'सीधे संघर्ष' में शामिल नहीं होकर इस भाव का उचित जवाब दिया है।

राज्य से सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम (अफ्सपा) वापस लेने की मांग पर, सरमा ने कहा, ‘‘जब इसकी समीक्षा की बात होगी तो इसके प्रवर्तन को कुछ युक्तिसंगत किया जाएगा। हालांकि हम एक बार में इसके पूरी तरह से वापसी की उम्मीद नहीं कर सकते। यह बहस बहुत जल्द समाप्त हो जाएगी।’’

असम में अफस्पा का मौजूदा समय 28 फरवरी को खत्म हो रहा है।

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