इंफाल, 25 जुलाई मणिपुर सरकार ने मंगलवार को ब्रॉडबैंड इंटरनेट पर लगे प्रतिबंध को सशर्त आंशिक रूप से हटाने की घोषणा की। हालांकि, मोबाइल इंटरनेट पर लगा प्रतिबंध जारी रहेगा। राज्य के गृह विभाग ने एक अधिसूचना में यह जानकारी दी।
मणिपुर में पिछले करीब तीन महीने से जारी जातीय हिंसा के कारण इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
गृह विभाग ने कहा कि कई नियमों और शर्तों के साथ ही ब्रॉडबैंड इंटरनेट पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है।
राज्य के गृह विभाग के मुताबिक इंटरनेट कनेक्शन केवल स्टेटिक आईपी के माध्यम से उपलब्ध होगा और संबंधित ग्राहक अस्थायी तौर पर दी गयी अनुमति वाले कनेक्शन के अलावा कोई अन्य कनेक्शन स्वीकार नहीं करेगा। (इस शर्त का अनुपालन न करने के लिए टीएसपी/आईएसपी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा)। संबंधित ग्राहक को किसी भी कीमत की अदायगी पर किसी भी राउटर और सिस्टम से वाईफ़ाई हॉटस्पॉट की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गृह विभाग की अधिसूचना में कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया वेबसाइटों और वीपीएन को ब्लॉक करना ग्राहकों द्वारा सुनिश्चित किया जाना चाहिए, और लॉग-इन आईडी तथा पासवर्ड को दैनिक आधार पर बदलना होगा।
इसमें कहा गया है कि किसी भी उल्लंघन के सिलसिले में ग्राहकों को कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा।
गृह विभाग ने बताया कि सरकार ने लोगों की पीड़ा पर विचार किया है, क्योंकि इंटरनेट पर प्रतिबंध के कारण कार्यालय और संस्थान प्रभावित हुए हैं और लोग घर से काम कर रहे हैं, इसके अलावा मोबाइल रिचार्ज, एलपीजी सिलेंडर बुकिंग, बिजली बिल का भुगतान और अन्य ऑनलाइन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
हालांकि, मोबाइल इंटरनेट सेवा पर लगा प्रतिबंध जारी रहेगा क्योंकि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से दुष्प्रचार और अफवाहों के फैलने की आशंका अब भी बनी हुई है।
भीड़ को संगठित करने के लिए बड़ी संख्या में एसएमएस भेजे जाने की आशंका भी बनी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप जानमाल या संपत्ति का नुकसान हो सकता है।
पुलिस महानिदेशक राजीव सिंह ने सोमवार को बताया था कि राज्य में अब भी घरों और परिसरों में हिंसा, हमले और आगजनी की घटनाओं की खबरें हैं, जिसमें गोलीबारी भी शामिल है।
मणिपुर में दो आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने और उनके साथ छेड़छाड़ करने का एक वीडियो सामने आने के बाद राज्य में तनाव और बढ़ गया है।
गौरतलब है कि मणिपुर मई की शुरुआत से ही जातीय संघर्ष की चपेट में है। तीन मई को वहां जातीय हिंसा शुरू हुई थी जिसमें 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
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