झा ने कहा कि सरकार एक हजार रूपए देने की बात करती है और यह प्रतिदिन के हिसाब से मात्र 33 रूपए होता है। इतनी कम राशि में किसी गरीब का कैसे गुजारा हो सकता है।
भाजपा के रवि प्रकाश वर्मा ने कहा कि सरकार को उन लोगों के संबंध में बयान देना चाहिए जिन्होंने जानबूझकर बैंकों से लिए गए ऋण नहीं लौटाए और विदेशों में रह रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र की घाटे में चल रही कंपनियों को निजी हाथों में नहीं बेचा जाना चाहिए और उसके बदले स्टॉक एक्सचेंज के जरिए आम लोगों से पैसे जुटाने चाहिए।
जद (यू) के आरसीपी सिंह ने कहा कि 2016 में बनी संहिता एक अच्छा और प्रगतिशील कानून है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाए गए संशोधनों से वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रही कंपनियों को मदद मिलेगी।
आप के नारायण दास गुप्ता ने कहा कि बड़े और छोटे ऋण लेने वालों के बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए।
बसपा के वीर सिंह ने सवाल किया कि क्या चूक की स्थिति में व्यक्तिगत गारंटर को उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए ?
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