देश की खबरें | ‘वनस्थली विद्यापीठ’ को राजीव गांधी राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार से सम्मानित किया गया

नयी दिल्ली, 20 अगस्त पूर्व उपराष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी ने राजस्थान में महिलाओं के लिए आवासीय शिक्षण संस्थान वनस्थली विद्यापीठ को 2020-21 के लिए 25वें राजीव गांधी राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार से रविवार को सम्मानित किया।

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में संस्था के सिद्धार्थ शास्त्री को यह पुरस्कार दिया गया।

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की स्वर्ण जयंती के मौके पर 1992 में स्थापित यह पुरस्कार शांति, सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के लिए विशेष योगदान के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को दिया जाता है और इसमें 10 लाख रुपये की नकद राशि और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।

यह पुरस्कार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर दिया जाता है।

पुरस्कार समारोह में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव, शांति और राष्ट्रीय एकता के आदर्श उस वक्त और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं, जब घृणा, समाज में विभाजन, कट्टरता और पक्षपात की राजनीति को बढ़ावा देने वाली ताकतें अधिक सक्रिय हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘उन्हें (ऐसी ताकतों को) सत्ता पक्ष का भी समर्थन मिल रहा है।’’

उन्होंने कहा कि उनके पति राजीव गांधी का जीवन ‘‘बहुत क्रूर तरीके’’ से समाप्त हुआ, लेकिन उन्होंने देश की सेवा में बिताई गई कम अवधि में ही कई उपलब्धियां हासिल कीं।

राजीव गांधी की 1991 में एक चुनाव प्रचार रैली में हत्या कर दी गई थी।

सोनिया गांधी ने कहा कि राजीव गांधी महिलाओं का सशक्तीकरण चाहते थे और यही कारण है कि उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने वोट देने की उम्र भी 21 साल से घटाकर 18 साल कर दी थी। उन्होंने कहा, ‘‘एक कहावत है कि यदि आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं, तो आप केवल एक व्यक्ति को शिक्षित करते हैं, लेकिन यदि आप एक महिला को शिक्षित करते हैं, तो आप पूरे परिवार और पीढ़ी को शिक्षित करते हैं।’’

उन्होंने राजीव गांधी के सपनों को पूरा करने में वनस्थली विद्यापीठ की शानदार भूमिका की सराहना की।

इस मौके पर खरगे ने कहा कि आजकल कई लोग राजीव गांधी की उपलब्धियों को कम करके आंकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी को 401 लोकसभा सीट का अब तक का सबसे बड़ा जनादेश मिला था, लेकिन उन्होंने विपक्ष सहित सभी को समान महत्व दिया, यहां तक कि उस पार्टी को भी महत्व दिया जिसने उस समय लोकसभा में केवल दो सीटों पर जीत दर्ज की थी।

खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान, कई प्रमुख विधेयक उचित चर्चा के बाद पारित किये जाते थे, आज की तरह नहीं कि जब विधेयक बिना चर्चा तथा राज्यसभा की चर्चा से बचने के लिए धन विधेयक बताकर पारित करा लिये जाते हैं।

अंसारी ने कहा कि यह पुरस्कार सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और शांति को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘ये उद्देश्य आपस में जुड़े हुए हैं और जाति, क्षेत्र, धर्म या की परवाह किए बिना भारत के सभी लोगों के बीच भावनात्मक एकता और सद्भाव के लिए काम करने और हिंसा का सहारा लिए बिना बातचीत और संवैधानिक तरीकों के माध्यम से उनके बीच सभी मतभेदों को हल करने की आवश्यकता होती है।’’

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