नयी दिल्ली, पांच मई बजरंग पूनिया को हाल ही में राष्ट्रीय ट्रायल के दौरान डोप टेस्ट के लिए अपना नमूना देने से इनकार करने पर अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया गया है।
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) इस मामले में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) द्वारा उसे ‘अंधेरे में’ रखने का आरोप लगाते हुए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) से शिकायत करने की योजना बना रहा है।
बजरंग को 23 अप्रैल को नाडा ने अस्थायी निलंबन सौंपा था। उन्हें आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए सात मई तक अपना जवाब भेजने को कहा गया था।
बिश्केक में एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर के लिए पुरुषों की राष्ट्रीय टीम चुनने के लिए ट्रायल 10 मार्च को सोनीपत में आयोजित किया गया था और बजरंग अपना मुकाबला हारने के बाद नमूना दिए बिना ही प्रतियोगिता स्थल से चले गये थे।
बजरंग ने अपने निलंबन पर कहा कि उन्होंने कभी भी नाडा अधिकारियों को अपना नमूना देने से इनकार नहीं किया।
उन्होंने नाडा पर ‘एक्सपायर हो चुकी किट’ देने का आरोप लगाते हुए ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मेरे बारे में जो डोप टेस्ट के लिए खबर आ रही है उसके लिये मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। मैंने कभी भी नाडा अधिकारियों को नमूना देने से इनकार नहीं किया, मैंने उनसे अनुरोध किया कि वे मुझे जवाब दें कि वे पहले मेरा नमूना लेने के लिए जो ‘एक्सपायर किट’ लाए थे, उस पर उन्होंने क्या कदम उठाए या क्या कार्रवाई की उसका जवाब दे दीजिये और फिर मेरा डोप टेस्ट ले लीजिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ मेरे वकील विदुष सिंघानिया इस पत्र का जवाब समय अनुसार देंगे।’’
तोक्यो खेलों के कांस्य पदक विजेता ने एक वीडियो भी पोस्ट किया जिसमें उन्होंने नमूना संग्रह के लिए मिली ‘एक्सपायर हो चुकी किट’ को दिखाते हुए अधिकारी से पूछा कि ऐसी किट क्यों लाई गईं।
यह वीडियो उस समय का है जब उनके नमूने को इकट्ठा करने वाला एक अधिकारी उनके पास आया था। इस वीडियो में, बजरंग ने कहा कि वह भाग्यशाली है कि उनके पास ऐसी टीम थी जिसने एक्सपायरी तारीख पर ध्यान दिया और अगर ऐसी किट जूनियर पहलवानों तक पहुंची तो उनका क्या होगा?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डब्ल्यूएफआई के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह उनके खिलाफ खुलकर विरोध करने वाली महिला पहलवानों को डराने के लिए ऐसी किटों का इस्तेमाल कर रहे थे।
इस वीडियो में बजरंग को अधिकारी से कहते हुए सुना गया, ‘‘मैं आपको दोष नहीं दे रहा हूं। यह ऊपर बैठे बड़े ‘मगरमच्छों’ का काम है। इन मामलों में पैसा बोलता है।’’
वाडा संहिता के अनुसार, ‘‘ डोपिंग रोधी नियमों के तहत अधिकृत अधिसूचना के बाद नमूना संग्रह जमा करने से इनकार करना, या बिना किसी कारण के असफल होना, या नमूना संग्रह से बचना डोपिंग-रोधी नियम का उल्लंघन है।’’
बजरंग अगर तय समय में अपना जवाब देने में असफल रहते हैं तो वह पेरिस ओलंपिक क्वालीफिकेशन की दौड़ से बाहर हो जाएंगे।
इस बीच डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने आश्चर्य व्यक्त किया कि नाडा ने उन्हें बजरंग के निलंबन के बारे में सूचित नहीं किया।
संजय ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘यह वास्तव में आश्चर्यजनक है कि नाडा ने बजरंग को निलंबित करते समय हमें सूचित नहीं किया। मैंने 25 अप्रैल को नाडा महानिदेशक और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की थी और उस बैठक में यह मामला नहीं उठाया गया था।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY