कोलकाता, 17 जनवरी वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री एम. जे. अकबर ने कहा कि जहां शेख मुजीबुर्रहमान की क्रांति ने 1971 में बांग्लादेश को आजादी दिलाई, वहीं उनकी बेटी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तानाशाही को हराकर और लोकतंत्र को फिर से स्थापित करके ‘‘दूसरी क्रांति’’ का नेतृत्व किया।
अकबर ने कहा कि बांग्लादेश ‘‘आधुनिक’’ राष्ट्र के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
‘इंडिया नैरेटिव’ संगठन द्वारा कोलकाता में भारत-बांग्लादेश संबंधों पर आयोजित एक कार्यक्रम में ढाका के लेखक एवं पत्रकार सैयद बदरुल एहसान के साथ बातचीत के दौरान अकबर ने यह बात कही।
राज्यसभा के पूर्व सदस्य अकबर ने कहा, ‘‘1971 की लड़ाई केवल आज़ादी की लड़ाई नहीं थी। वह विचारधारा की लड़ाई भी थी।’’
उन्होंने कहा कि शेख मुजीबुर्रहमान ने 1971 में पूर्वी पाकिस्तान को मुक्त कराने और बांग्लादेश के गठन के लिए हुए विद्रोह का नेतृत्व किया था और उनकी बेटी ‘‘ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तानाशाही को मात देकर लोकतंत्र दोबारा स्थापित कर दूसरी क्रांति का नेतृत्व किया।’’
उन्होंने कहा कि उन्हें ‘‘बांगाबीर’’ (बंगाल की योद्धा) कहा जा सकता है।
शेख हसीना 2009 में चुनाव से सत्ता में आईं और इसी के साथ सेना समर्थित कार्यवाहक सरकार के शासन के दौरान लागू आपातकाल समाप्त हो गया था।
स्वतंत्रता के 51 वर्षों के दौरान बांग्लादेश में कई बार सैन्य तख्तापलट हुआ है और 2009 से शेख हसीना का कार्यकाल लोकतांत्रिक शासन की लंबी अवधि के रूप में सामने आया है।
वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि फ्रांसीसी क्रांति के समय से ही लोग स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के बारे में सुनते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ अब इसमें एक और महत्वपूर्ण पहलू ‘आधुनिकता’ को जोड़ा जाना चाहिए। आधुनिकता लोकतंत्र है, आधुनिकता धार्मिक स्वतंत्रता है और सबसे जरूरी, आधुनिकता गरीबी उन्मूलन है। बांग्लादेश आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है।’’
वहीं एहसान ने कहा कि बांग्लादेश एक मजबूत राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने आजाद होने के एक साल के भीतर अपने संविधान को अपनाया और दो साल के भीतर अपना पहला आम चुनाव कराया।
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