देश की खबरें | विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों ने सुरक्षा नेटवर्क को लगातार बेहतर बनाने पर जोर दिया

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल क्या 1999 में हुए कंधार विमान अपहरण को रोका जा सकता था? 1985 में एअर इंडिया के विमान में बम फटने के समय क्या परिस्थितियां थीं, जिसमें 329 लोगों की मौत हो गई थी?

नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के 37वें स्थापना दिवस के अवसर पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों ने इन मुद्दों समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

बीसीएएस की स्थापना सिलसिलेवार विमान अपहरण और दुर्घटनाओं के बाद एक अप्रैल, 1987 को हुई थी। इसकी स्थापना मॉन्ट्रियाल से लंदन जा रहे एअर इंडिया के कनिष्क नामक विमान में 31 हजार फुट की ऊंचाई पर बम फटने के लगभग दो साल बाद हुई थी। उस दुर्घटना में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी।

भारत के विमानन क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के बीच विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सुरक्षा नेटवर्क को लगातार उन्नत बनाने की आवश्कता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री वी. के. सिंह ने 1999 के कंधार अपहरण का जिक्र करते हुए संदेश दिया कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ संकट के दौरान निर्णय लेना प्रमुख चुनौतियों में से एक है।

जनरल (सेवानिवृत्त) सिंह ने कहा, “जहां तक सुरक्षा का संबंध है, तो हमें आगे देखने की आवश्यकता है। हमें यह पता लगाने की आवश्यकता है कि आने वाली चुनौतियां क्या हैं। जैसे-जैसे तकनीक अधिक घातक होती जा रही है और हर किसी के लिए उपलब्ध होती जा रही है, वैसे-वैसे चीजों के गलत होने की आशंका अधिक होती जा रही है।”

उन्होंने कहा, “विमानन क्षेत्र में निर्णय लेने की भी समस्या है। क्या कंधार को रोका जा सकता था? क्या इससे अलग तरीके से निपटा जा सकता था? क्या मीडिया उस समय की तुलना में कुछ अलग कर सकता था? कई सवाल हैं। प्रत्येक घटना में, यदि आप विश्लेषण करें, तो आप इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि निर्णय लेने में बड़ी दुविधा थी।”

केंद्रीय मंत्री सिंह ने निर्णय लेने में आने वाली दुविधा को दूर करने के उपाय सुझाए।

उन्होंने कहा, “भविष्य में, हमें इस कारक के बारे में जागरूक रहने की आवश्यकता है क्योंकि जब आप किसी स्थिति का सामना करते हैं, तो उस समय उन चीजों पर काम करना शुरू करना मुश्किल होता है, जिनसे आपको परिणाम मिल सकता है। लेकिन अगर आपका दिमाग पहले से ही काम कर रहा है और अगर यह आपकी सोचने की प्रक्रिया का हिस्सा है, तो आपको समाधान मिल जाएगा।”

साल 1999 में नेपाल से दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइंस के एक विमान का अपहरण कर उसे कंधार ले जाया गया था। इसके बाद भारत में जेल में बंद तीन आतंकवादियों के बदले यात्रियों को रिहा किया गया था।

बीसीएएस के महानिदेशक जुल्फिकार हसन ने कहा कि 24 दिसंबर, 1999 को आईसी-814 का अपहरण संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में उभरा क्योंकि इस घटना के कारण तीन आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा।

हसन ने कहा, “और इसके परिणामस्वरूप एक आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद का गठन हुआ जिसने 2001 में संसद पर हमला किया। इसीलिए बीसीएएस जैसे संगठन की आवश्यकता और प्रासंगिकता आज भी कायम है, जो आज की आधुनिक चुनौती के युग में अपरिहार्य बने हुए हैं।”

नागरिक उड्डयन सचिव राजीव बंसल ने कहा कि हालांकि भारतीय उड्डयन क्षेत्र दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है, फिर भी हवाई अड्डों के प्रबंधन के लिए कुशल जनशक्ति एक बड़ी चुनौती है।

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