नयी दिल्ली, छह मई एजीएमयूटी कैडर के सिविल सेवा अधिकारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे एक समूह ने एक आईएएस अधिकारी की हत्या के दोषी पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई पर गहरी चिंता एवं क्षोभ व्यक्त किया है।
पूर्व सांसद को बिहार सरकार की जेल नियमावली में बदलाव के बाद जेल से रिहा कर दिया गया है।
एसोसिएशन ने चार मई को जारी एक बयान में कहा कि यह जी. कृष्णैया और उनके परिवार को ‘न्याय से वंचित करने के समान है। जी. कृष्णैया 1994 में गोपालजंग के जिलाधिकारी थे, जब उनकी हत्या की गई।
एजीएमयूटी कैडर के आईएएस अधिकारियों की एसोसिएशन ने एक बयान में कहा कि कैदियों के वर्गीकरण नियमों में संशोधन करके आनंद मोहन को रिहा किया गया है।
यह एसोसिएशन अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और संघ शासित प्रदेशों (एजीएमयूटी) कैडर में काम करने वाले आईएएस अधिकारियों का है।
एसोसिएशन ने कहा, ‘‘एसोसिएशन ने दिवंगत जी. कृष्णैया, आईएएस के परिवार के लिए न्याय मांगने में भारतीय सिविल और प्रशासनिक सेवा (केन्द्रीय) एसोसिएशन के साथ एकजुटता प्रदर्शित की है। एसोसिएशन न्याय की इस लड़ाई में मृत अधिकारी के परिवार के साथ दृढ़ता से खड़ा है।’’
इससे पहले भारतीय सिविल और प्रशासनिक सेवा (केन्द्रीय) एसोसिएशन ने एक बयान में मोहन की रिहाई को ‘‘न्याय से वंचित करने’’ के समान बताया और बिहार सरकार से फैसले पर पुन:विचार करने का अनुरोध किया।
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