देश की खबरें | सहायक बेसिक शिक्षक चयन प्रक्रिया : उच्च न्यायालय ने आदेश किया सुरक्षित
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न्यायमूर्ति पी के जायसवाल और न्यायमूर्ति डी के सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी के जरिए दाखिल तीन विशेष अपीलों पर उक्त आदेश दिया। ये अपीलें तीन जून को एकल पीठ के अंतरिम स्थगनादेश के खिलाफ की गयी हैं।

इससे पहले अपील पर सुनवाई नौ जून को होनी थी लेकिन राज्य सरकार के अनुरोध पर अदालत ने इस मामले में सोमवार को सुनवायी की।

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रविवार को परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने राज्य सरकार की ओर से एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली अपील दाखिल की थी। उसका कहना था कि यह फैसला अनुचित और अवैध है।

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह ने तर्क दिया कि प्रश्न और उत्तर के संबंध में किसी विवाद के प्रकरण में प्राधिकारी का फैसला अंतिम था और एक बार उसने विशेषज्ञों की राय के आधार पर कोई फैसला कर लिया तो उस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

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राज्य सरकार की दलील का विरोध करते हुए वरिष्ठ वकील एल पी मिश्रा, एचजीएस परिहार, असित चतुर्वेदी, जे एन माथुर और सुदीप सेठ ने हालांकि कहा कि एकल पीठ का आदेश सही एवं उचित था और इसमें कोई अवैध बात नहीं है।

वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि एकल पीठ का आदेश विस्तृत है और अगर एक बार उसे दस्तावेजों से पता चलता है कि कुछ सवाल और जवाब गलत थे तो वह अपनी आंखें नहीं बंद कर सकती।

मिश्रा के लिखित बयान को स्वीकार करते हुए पीठ ने अन्य वरिष्ठ वकीलों को मंगलवार सुबह दस बजे तक अपने मुवक्किलों की ओर से लिखित बयान सौंपने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि वह अपना आदेश सुरक्षित कर रही है।

लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने तीन जून को चयन प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। प्रथम दृष्टया अदालत ने पाया था कि कुछ सवाल एवं जवाब गलत थे इसलिए उनकी नये सिरे से जांच की आवश्यकता है। उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा था कि प्रश्नपत्रों की जांच में त्रुटि है।

भर्ती के लिए परीक्षा छह जनवरी 2019 को हुई थी और उसके परिणाम इस साल 12 मई को घोषित हुए।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने 21 मई को राज्य सरकार से कहा था कि वह एक चार्ट के जरिए नियुक्ति के लिए अपनायी गयी प्रक्रिया को समझाये। शीर्ष अदालत ने सुनवायी की अगली तारीख छह जुलाई तय की है।

शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि उसने सामान्य श्रेणी के लिए 45 प्रतिशत और आरक्षित श्रेणी के लिए 40 प्रतिशत के कट आफ अंक के मानदंड को क्यों बदला।

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