गांधीनगर, 22 सितंबर गुजरात विधानसभा की एक समिति ने कृष्णा गोदावरी (केजी) बेसिन ब्लॉक में खुदाई कार्य में करीब 500 करोड़ रुपये के नुकसान को लेकर गुजरात राज्य पेट्रोलियम निगम (जीएसपीसी) की आलोचना की है।
विधानसभा समिति ने कहा है कि अगर राज्य सरकार-नियंत्रित कंपनी ‘जिम्मेदार और सतर्क’ तरीके से काम करती तो इस नुकसान से बचा जा सकता था।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) की निगरानी करने वाली सार्वजनिक उद्यम समिति ने बुधवार को विधानसभा में पेश अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि समिति के समक्ष दर्ज वरिष्ठ अधिकारियों के मौखिक बयान और कंपनी की लिखित सामग्री में अंतर जीएसपीसी के ‘गैर-जिम्मेदाराना रवैये’ को दर्शाता है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक एवं गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा की अध्यक्षता वाली समिति में राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के 14 सदस्य शामिल हैं।
समिति सार्वजनिक उपक्रमों पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा की गई टिप्पणियों की जांच करती है और राज्य सरकार को सिफारिशें भेजती है।
समिति ने कहा कि कैग ने 2017 में विधानसभा में पेश अपनी ऑडिट रिपोर्ट में कहा था कि ‘समुद्र से गैस निकालने के लिए कुएं की खुदाई में संचालनगत त्रुटियों’ की वजह से राज्य द्वारा संचालित जीएसपीसी को लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा।
कैग ने कहा था कि ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि जीएसपीसी ने निर्धारित जगह से बाहर खुदाई की और कंपनी को काफी समय बाद इसका एहसास हुआ।
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