गुवाहाटी, नौ दिसंबर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने राज्य को लेकर दिये गये एक बयान के संबंध में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पर पलटवार किया है। सिब्बल ने दावा किया था कि असम कभी म्यांमा का हिस्सा था।
असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने सिब्बल को पत्र लिखकर बयान वापस लेने और माफी मांगने को कहा।
इस सप्ताह की शुरुआत में नागरिकता मुद्दे पर सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय में पेश हुए सिब्बल ने दावा किया था कि असम म्यांमा का हिस्सा था और 1824 में ब्रिटिश द्वारा क्षेत्र का कुछ हिस्सा जीतने के बाद इसे उन्हें सौंप दिया गया था।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, शर्मा ने शुक्रवार को कहा था कि असम पर कुछ समय के लिए कब्जे को छोड़कर राज्य कभी भी म्यांमा का हिस्सा नहीं था।
मुख्यमंत्री ने कहा, “असम कभी भी म्यांमा का हिस्सा नहीं था। यह सच है कि अहोम शासन के दौरान वहां (म्यांमा) के लोगों का हमारे लोगों के साथ संघर्ष हुआ था। लगभग एक-दो महीने की संक्षिप्त अवधि के लिए, हम म्यांमा के कब्जे जैसी स्थिति में थे।"
शर्मा ने कहा, ''जिन लोगों को इतिहास के बारे में कोई जानकारी नहीं है, उन्हें टिप्पणी करने से बचना चाहिए।''
सैकिया ने शनिवार को सिब्बल को लिखे पत्र में दावा किया, "असम के इतिहास की गलत प्रस्तुति बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और इसने असम के गौरव और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है।"
उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और एएएमएसयू ने आपको असम के इतिहास के बारे में गलत जानकारी प्रदान की होगी और आपकी टीम प्रस्तुति से पहले जानकारी की जांच करने में विफल रही है।”
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