गुवाहाटी, छह मई असम में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया के खिलाफ कांग्रेस समेत 11 विपक्षी दलों ने शनिवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंपा।
इन दलों ने दावा किया कि जिन मुद्दों को लेकर राज्य में पहले परिसीमन की कवायद टाल दी गई थी, उनका अब भी समाधान नहीं हुआ है।
ज्ञापन में कहा गया है कि देश में यह प्रक्रिया परिसीमन कानून-2002 के तहत वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर शुरू की गई थी, लेकिन इसका असम में इतना व्यापक पैमाने पर विरोध किया गया कि इस कवायद को टालना पड़ा।
असम में परिसीमन की कवायद को टालने का विस्तृत आदेश राष्ट्रपति की ओर से आठ फरवरी, 2008 को जारी किया गया था, जिसमें कुछ कारणों का जिक्र था।
इस बार दिये गये ज्ञापन में कांग्रेस के अलावा माकपा, रायजोर दल,असम जातीय परिषद्,जातीय दल असोम,भाकपा,राकांपा, भाकपा (माले), राजद, जद (यू) और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के दस्तखत हैं।
चुनाव आयोग द्वारा पिछले साल 27 दिसंबर को जारी एक अधिसूचना के अनुरूप राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया एक जनवरी, 2023 को शुरू हुई।
इससे पहले 31 दिसंबर, 2022 को असम कैबिनेट ने चार जिलों को उन जिलों में मिलाने का फैसला किया था, जिनसे वे अलग किए गए थे। विश्वनाथ को सोनितपुर, होजई को नगांव, तमुलपुर को बक्सा और बजाली को बरपेटा में मिलाया गया था।
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