एजेंसी ने कहा कि एशिया में बिजली की ज्यादा खपत 1.4 अरब आबादी वाले चीन में की जाएगी, जिसकी वैश्विक विद्युत खपत में हिस्सेदारी 2015 के एक चौथाई से बढ़ कर इस दशक के मध्य तक एक तिहाई हो जाएगी।
आईईए के ऊर्जा बाजार एवं सुरक्षा निदेशक केसुके सदामोरी ने कहा, ‘‘चीन यूरोपीय संघ, अमेरिका और भारत की संयुक्त विद्युत खपत से अधिक बिजली की खपत करेगा।’’
वहीं, इसके उलट अफ्रीका-जहां करीब आठ अरब लोग रहते हैं-2025 में वैश्विक बिजली खपत का महज 3 प्रतिशत ही उपभोग करेगा।
सदामोरी ने कहा, ‘‘इसका और तेजी से बढ़ती आबादी का यह मतलब है कि अफ्रीका में विद्युतीकरण बढ़ाने की अत्यधिक जरूरत है।’’
आईईए की वार्षिक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि परमाणु ऊर्जा और पवन एवं सौर ऊर्जा जैसे स्रोतों से आने वाले तीन वर्षों में वैश्विक विद्युत आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा पूरा किया जाएगा।
एजेंसी की 134 पन्नों की रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि बिजली की मांग एवं आपूर्ति मौसम पर निर्भर होती जा रही है और वह इस समस्या का नीति निर्माताओं से समाधान करने की अपील करती है।
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